18 मिनट 32 सेकंड के मौजूदा रिस्पांस टाइम को घटाकर करीब 10 मिनट करने का लक्ष्य, एम्बुलेंस की संख्या 553 से बढ़कर 642 होगी
गांधीनगर, 19 सितंबर। गुजरात के सुदूर और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और तेज करने के लिए राज्य सरकार ने 108 एम्बुलेंस नेटवर्क के विस्तार की तैयारी की है। इन क्षेत्रों में 89 नई एम्बुलेंस तैनात की जाएंगी। सरकार का मुख्य लक्ष्य दुर्गम इलाकों में एम्बुलेंस के पहुंचने का समय कम करना है, ताकि गंभीर मरीजों को जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता मिल सके।
वर्तमान में आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 108 एम्बुलेंस का औसत रिस्पांस टाइम 18 मिनट 32 सेकंड है। नई एम्बुलेंस की तैनाती के बाद इसे घटाकर करीब 10 मिनट तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। खास तौर पर ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां पहाड़ी रास्तों, कच्ची सड़कों, भारी बारिश और बाढ़ के कारण सामान्य एम्बुलेंस को मरीज तक पहुंचने में अधिक समय लगता है।
553 से बढ़कर 642 होगी एम्बुलेंस की संख्या
नई एम्बुलेंस के नेटवर्क में शामिल होने के बाद आदिवासी बहुल जिलों में 108 एम्बुलेंस की संख्या 553 से बढ़कर 642 हो जाएगी। इससे दूरदराज के गांवों और दुर्गम इलाकों में आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है।
राज्य में वर्तमान औसत रिस्पांस टाइम करीब 13 मिनट 9 सेकंड है। शहरी क्षेत्रों में यह करीब 9 मिनट 55 सेकंड, ग्रामीण क्षेत्रों में 16 मिनट 28 सेकंड और आदिवासी बहुल दुर्गम क्षेत्रों में 18 मिनट 32 सेकंड है। नई योजना के जरिए आदिवासी क्षेत्रों और अन्य क्षेत्रों के बीच रिस्पांस टाइम के इस अंतर को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
89 नई एम्बुलेंस में अलग-अलग श्रेणियां
आदिवासी क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 89 नई एम्बुलेंस में तीन तरह की गाड़ियां शामिल की जाएंगी।
22 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस गंभीर मरीजों को आवश्यक जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए होंगी। वहीं 55 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एम्बुलेंस सामान्य आपातकालीन परिवहन और प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता के लिए इस्तेमाल की जाएंगी।
इसके अलावा 12 विशेष 4WD एम्बुलेंस दुर्गम क्षेत्रों के लिए तैनात की जाएंगी। इन वाहनों को कच्चे रास्तों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और भारी बारिश या बाढ़ जैसी स्थिति में भी मरीजों तक पहुंचने के लिए उपयोग किया जाएगा।
बारिश और बाढ़ के दौरान 4WD एम्बुलेंस से मिलेगी मदद
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मानसून के दौरान कई स्थानों पर रास्ते खराब होने और जलभराव के कारण सामान्य वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। ऐसे समय में विशेष 4WD एम्बुलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन वाहनों का उद्देश्य ऐसे इलाकों में भी आपातकालीन मरीजों तक पहुंचना है, जहां सामान्य एम्बुलेंस को पहुंचने में परेशानी होती है।
गोल्डन आवर में उपचार मिलने की संभावना बढ़ेगी
आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में शुरुआती समय काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। एम्बुलेंस के तेजी से मरीज तक पहुंचने और उसे अस्पताल ले जाने से गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
इस योजना में केवल एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि मरीज तक तेजी से पहुंचने और मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाने, दोनों पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
गुजरात सरकार के जनजातीय विकास विभाग द्वारा तैयार की गई इस योजना के तहत नई 89 एम्बुलेंस की खरीद प्रक्रिया जारी है। तैनाती के बाद इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से आदिवासी बहुल और दुर्गम क्षेत्रों में किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य आपात स्थिति में भौगोलिक दूरी और कठिन रास्तों के कारण होने वाली देरी को कम कर लोगों तक समय पर जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना है।
