एक साल में 15 लाख से ज्यादा यात्रियों ने किया सफर, 2,500 से अधिक माल वैगन पहुंचे; पर्यटन और कारोबार को भी मिला बढ़ावा
नई दिल्ली | 13 सितंबर 2026
मिजोरम में रेल कनेक्टिविटी के नए दौर की शुरुआत करने वाली बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन ने एक साल पूरा कर लिया है। 13 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 51.38 किलोमीटर लंबी इस रेलवे लाइन और सैरांग रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया था। इसके बाद मिजोरम को देश के प्रमुख शहरों से सीधी रेल कनेक्टिविटी मिली है। यह रेलवे लाइन बैराबी से आगे होर्टोकी, कानपुई, मुआलखांग और सैरांग को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। सैरांग स्टेशन मिजोरम की राजधानी आइजोल के नजदीक प्रमुख यात्री और माल ढुलाई केंद्र के रूप में विकसित हुआ है।
45 सुरंगें और 153 पुल, सबसे ऊंचा पुल 114 मीटर
बैराबी-सैरांग रेल परियोजना को मिजोरम के कठिन पहाड़ी इलाके में बनाया गया है। रेलवे लाइन करीब 16 किलोमीटर लंबी 45 सुरंगों से होकर गुजरती है। परियोजना में कुल 153 पुल बनाए गए हैं, जिनमें 55 बड़े और 88 छोटे पुल शामिल हैं।
इस रेल लाइन का सबसे ऊंचा पुल करीब 114 मीटर ऊंचा है। यह दिल्ली के कुतुब मीनार से करीब 42 मीटर अधिक ऊंचा बताया गया है।
15 लाख से ज्यादा यात्रियों ने किया सफर
रेलवे के मुताबिक, पिछले एक साल में सैरांग से चलने वाली प्रमुख ट्रेनों ने 1,100 से अधिक यात्राएं पूरी की हैं और इनसे 15 लाख से ज्यादा यात्रियों ने सफर किया है।
सैरांग को गुवाहाटी, कोलकाता और दिल्ली से जोड़ने वाली ट्रेन सेवाओं के अलावा सैरांग-सिलचर यात्री ट्रेन भी शुरू की गई है। इससे मिजोरम और असम की बराक घाटी के बीच नियमित रेल संपर्क मजबूत हुआ है।
सैरांग रेलवे स्टेशन पर पिछले एक साल में 5.54 लाख से ज्यादा यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई। यहां रोजाना औसतन करीब 3,300 यात्री आते-जाते हैं।
माल ढुलाई में भी बड़ा बदलाव
रेलवे लाइन शुरू होने के बाद मिजोरम में माल पहुंचाने के लिए रेल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। 14 सितंबर 2025 को पहली मालगाड़ी 26 हजार से ज्यादा सीमेंट बैग लेकर सैरांग पहुंची थी।
इसके बाद दिसंबर 2025 में गुवाहाटी के पास चांगसारी से 119 मारुति कारों की पहली खेप भी रेल के जरिए सैरांग पहुंची।
रेलवे के अनुसार, एक साल में सैरांग में 2,500 से ज्यादा माल वैगन पहुंच चुके हैं। इनमें करीब 70 प्रतिशत माल सीमेंट, पत्थर और रेत जैसी निर्माण सामग्री का था। इसके अलावा चावल, खाद और ऑटोमोबाइल की खेप भी पहुंची।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिला फायदा
सीधी रेल कनेक्टिविटी से मिजोरम पहुंचने वाले घरेलू पर्यटकों के लिए यात्रा के नए विकल्प उपलब्ध हुए हैं। रेलवे के अनुसार, रेल सेवा शुरू होने के बाद राज्य में पर्यटन में 86 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी, गाइड और स्थानीय बाजारों जैसे कारोबार को भी फायदा मिलने की बात कही गई है।
स्थानीय उत्पादों के लिए खुला राष्ट्रीय बाजार
रेलवे ने मिजोरम के स्थानीय उत्पादों को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने का रास्ता भी खोला है। 19 सितंबर 2025 को सैरांग से पहली पार्सल खेप दिल्ली भेजी गई थी। इसमें एंथुरियम के फूल शामिल थे।
रेलवे के पार्सल और माल ढुलाई नेटवर्क के जरिए भविष्य में मिजोरम के हैंडलूम, बांस, बेंत, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार हुआ है।
शिक्षा और रोजगार के अवसरों में भी बढ़ी कनेक्टिविटी
दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी और सिलचर से रेल संपर्क मिलने के बाद मिजोरम के छात्रों के लिए देश के दूसरे हिस्सों में विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं, कोचिंग संस्थानों और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों तक पहुंच आसान हुई है।
रेलवे कनेक्टिविटी से राज्य में होने वाले खेल, सांस्कृतिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में बाहर से आने वाले लोगों के लिए भी यात्रा के विकल्प बढ़े हैं।
एक साल में बदली कनेक्टिविटी की तस्वीर
बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन के एक साल के सफर में यात्री परिवहन, माल ढुलाई, पर्यटन, शिक्षा और स्थानीय कारोबार से जुड़े कई क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिला है। 51.38 किलोमीटर की यह रेल लाइन अब मिजोरम को देश के बड़े शहरों और बाजारों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है।
