भारत के तीर्थस्थल पुनर्प्रतिष्ठा को प्राप्त कर गए लेकिन आक्रांताओं के खानदान का अता-पता नहीं : योगी

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  • श्रीशिव गोरखनाथ आश्रम में नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व आठमान भंडारा कार्यक्रम में शामिल हुए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

बागपत{ गहरी खोज }: गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को उप्र के बागपत जिले में श्रीशिव गोरखनाथ आश्रम में नवनाथों की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा व आठमान भंडारा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सनातन की ताकत का अहसास कराने बागपत आया हूं। इतिहास गवाह है कि सनातन धर्म ने कभी किसी पर जबरन आधिपत्य स्थापित नहीं किया। किसी को गुलाम नहीं बनाया। जब हम किसी पर जबरन शासन या भूमि पर कब्जा नहीं करते तो हमारा देश इसे कैसे स्वीकार कर सकता था।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत लगातार विदेशी आक्रांताओं से जूझता रहा, सम-विषम परिस्थितियों में लड़ता रहा। जिन आक्रांताओं ने भारत के सनातन की आस्था के प्रतीक मठ-मंदिरों, तीर्थस्थलों को विखंडित करने का प्रयास किया, वे तीर्थस्थल पुनर्प्रतिष्ठा को प्राप्त कर गए, लेकिन आक्रांताओं का नामो-निशान नहीं बचा। वे सब मिट्टी में मिल गए। उनके खानदान तक का भी अता-पता नहीं है।
योगी ने कहा कि धर्मो रक्षति रक्षितः, यानी आप धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म आपकी रक्षा करेगा। स्वार्थ के लिए धर्म का दुरुपयोग करेंगे तो उससे नष्ट हुआ धर्म हमें भी नष्ट कर डालेगा। हमें जाने-अनजाने देश व धर्म को नुकसान नहीं पहुंचने देना चाहिए। व्यक्तिगत क्षति की भरपाई हो सकती है, लेकिन धर्म की क्षति की भरपाई नहीं हो सकती। उसका खामियाजा वर्तमान और भावी पीढ़ी भी भुगतेगी।
उन्होंने कहा कि आज 1000 वर्ष की दासता से मुक्ति के लिए सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा का अमृत पर्व भी है। 1026 में विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। 1951 में आज ही के दिन प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के करकमलों से पुनर्प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर आज सोमनाथ मंदिर में उपस्थित रहे। मुझे भी काशी विश्वनाथ महादेव के चरणों में इस आयोजन से जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ। आज ही के दिन अटल जी ने ऑपरेशन शक्ति के अंतर्गत पोखरण में तीन परमाणु विस्फोट किए थे। यह बताता है कि हमारी शक्ति हमारे सामर्थ्य की प्रतीक तो है ही, विश्व कल्याण के लिए भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
योगी ने कहा कि बागपत का इतिहास महाभारत कालीन है। भगवान कृष्ण ने पांडवों के लिए कौरवों से जो पांच गांव मांगे थे, उनमें एक बागपत भी था। चार वर्ष पहले आया था तो यह बहुत छोटा सा स्थान था लेकिन अर्जुन नाथ जी व उनके सहयोगी ग्रामीणों व श्रद्धालुओं ने इसे तीर्थ बना दिया है। विरासत की रक्षा ऐसे ही होती है। बागपत की इसी धरा ने किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को जन्म दिया था। यहां के डॉ. सत्यपाल सिंह ने मुंबई पुलिस के मुखिया के रूप में कानून का शासन स्थापित किया। चौधरी जयंत सिंह के नेतृत्व में राष्ट्रीय लोकदल केंद्र व राज्य सरकार के साथ मिलकर बागपत समेत प्रदेश व देश के विकास के लिए नित नए कीर्तिमान स्थापित करने में सहायक हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक केंद्रों की पुनर्प्रतिष्ठा हो रही है। हम अतीत से जुड़कर ही उज्ज्वल भविष्य की कामना कर सकते हैं। महायोगी गुरु गोरखनाथ भगवान शिव के योगी रूप हैं। योगी रूप में उन्होंने धर्म की अलख जगाने के लिए जनजागरण के विशाल कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया था। उनके सिद्धों, योगियों ने गुलामी कालखंड में भी जन-जागरण के अभियान को निरंतरता प्रदान की। वे योगी गांव-गांव जाकर सारंगीवादन व भजन के माध्यम से समाज को एकजुट कर विदेशी आक्रांताओं का मुकाबला करने के लिए तैयार करते थे, यही उनकी राष्ट्रभक्ति थी। उनके भजनों में संदेश भी होता था कि आक्रांता आ रहा है, तैयार हो जाओ। इससे पहले कि वह आपके गांव व घर तक पहुंचे, उसका काम तमाम कर डालो। योगी सिर्फ गुफाओं, धूनी, मंदिरों तक सीमित नहीं रहे। धर्म व संस्कृति पर हमला होगा तो योगी बैठेगा नहीं, बल्कि मुकाबला कर मुंहतोड़ जवाब देगा। जो संकट के समय निडरता से खड़ा हो, वही संत है। संकट में पलायन करने वाला संत नहीं हो सकता।
इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री जसवंत सिंह सैनी, केपी मलिक, सांसद राजकुमार सांगवान, तिजारा राजस्थान के विधायक बाबा बालकनाथ, विधायक अजय कुमार, योगेश धामा, महंत अर्जुननाथ, महंत चेताईनाथ, पीर लहरनाथ, पीर महंत हरिनाथ, समुद्रनाथ, शेरनाथ, जिताई नाथ, पीर राजनाथ जी महाराज, हरिनाथ जी महाराज, श्रीकृष्ण नाथ, महंत मिथिलेश नाथ, पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह आदि मौजूद रहे।

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