गुजरात में गोबरधन योजना से बदल रही गांवों की तस्वीर, 14 हजार से ज्यादा बायोगैस प्लांट चालू

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20 हजार नए बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी, हर लाभार्थी को 25 हजार रुपए की सब्सिडी

गांधीनगर। गुजरात में गोबरधन योजना ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खेती का बड़ा आधार बन रही है। राज्य में अब तक 14 हजार से अधिक बायोगैस प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 20 हजार नए प्लांट लगाने का काम शुरू किया गया है। इस परियोजना पर राज्य सरकार करीब 25 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

हाल ही में केंद्र सरकार ने भी 23,731 करोड़ रुपए की राष्ट्रीय सर्कुलर बायोएनर्जी योजना ‘गोबरधन’ को मंजूरी दी है। गुजरात इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन वाले प्रमुख राज्यों में शामिल है।

25 हजार रुपए की सब्सिडी, सिर्फ 5 हजार का अंशदान

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत बायोगैस प्लांट लगाने वाले प्रत्येक लाभार्थी को 25 हजार रुपए की सरकारी सहायता दी जाती है, जबकि लाभार्थी को केवल 5 हजार रुपए का योगदान देना होता है।

एक प्लांट से सालभर में 8 से 10 LPG सिलेंडर की बचत

यूनिसेफ के सर्वे के अनुसार 2 घनमीटर क्षमता वाला एक बायोगैस प्लांट हर साल 8 से 10 एलपीजी सिलेंडर की बचत करता है। इससे 18 हजार किलो से अधिक गोबर का वैज्ञानिक प्रबंधन होता है और 834 किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी कम होता है।

महिलाओं को धुएं से राहत, किसानों को जैविक खाद

गोबरधन योजना से ग्रामीण परिवारों को रसोई के लिए स्वच्छ बायोगैस मिल रही है। वहीं प्लांट से निकलने वाली बायोस्लरी खेतों के लिए जैविक खाद का काम कर रही है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घट रही है और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिल रहा है।

दो चरणों में 14 हजार से अधिक प्लांट

राज्य सरकार ने क्लस्टर मॉडल के तहत योजना लागू की है। पहले चरण में एनडीडीबी, अमूल, बनास और दूधसागर डेयरी के सहयोग से 7,423 बायोगैस प्लांट लगाए गए। दूसरे चरण में 50 क्लस्टरों में 10 हजार प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया, जिनमें से करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

गिर सोमनाथ की मंजुलाबेन बनीं मिसाल

गिर सोमनाथ जिले के रंगपुर गांव की मंजुलाबेन बारड ने गोबरधन योजना के तहत घर में बायोगैस प्लांट लगाया। पहले गोबर खुले में जमा होने से गंदगी और दुर्गंध रहती थी, लेकिन अब उसी गोबर से रसोई गैस और जैविक खाद तैयार हो रही है। इससे एलपीजी और रासायनिक खाद दोनों का खर्च कम हुआ है। मंजुलाबेन का मॉडल अब आसपास के पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा बन गया है।

सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण स्वच्छता, स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए गोबरधन योजना का तेजी से विस्तार कर रही है।

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