सिंह पालतू पशु नहीं, नीलगाय-जंगली सूअर ज्यादा खाते हैं: तटीय इलाकों के अध्ययन में बड़ा खुलासा
अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल ‘कंजर्वेशन’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार तटीय क्षेत्रों में सिंहों के कुल शिकार से मिलने वाले बायोमास में करीब 70% हिस्सा वन्यजीवों का है। इनमें नीलगाय और जंगली सूअर प्रमुख शिकार हैं, जबकि आवारा पशुओं की हिस्सेदारी करीब 31% रही।
शोध की सबसे अहम बातें
- तटीय सौराष्ट्र में करीब 100 सिंह रह रहे हैं।
- सिंहों के कुल शिकार के बायोमास में करीब 70% हिस्सा वन्यजीवों का।
- आहार विश्लेषण में 64% वन्यजीव और 31% आवारा पशु पाए गए।
- नीलगाय अकेले 51% बायोमास का प्रमुख स्रोत रही।
- जंगली सूअर दूसरा प्रमुख वन्य शिकार।
- अध्ययन में 160 मल नमूनों का विश्लेषण किया गया।
- सिंह नीलगाय और जंगली सूअरों की संख्या नियंत्रित कर फसल नुकसान कम करने में किसानों के लिए प्राकृतिक मददगार साबित हो रहे हैं।
- 2025 की गणना में गुजरात में 891 एशियाई सिंह दर्ज किए गए।
- गिर के बाहर सिंहों का प्राकृतिक शिकार पर निर्भर रहना तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के बेहतर स्वास्थ्य का संकेत है।
गिर से बाहर समुद्र तटीय क्षेत्रों में करीब 100 सिंहों की मौजूदगी; किसानों के लिए बने ‘प्राकृतिक प्रहरी’
गांधीनगर, 18 जुलाई। गिर के जंगल से बाहर सौराष्ट्र के समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले एशियाई सिंहों को लेकर वर्षों से चली आ रही धारणा गलत साबित हुई है। आमतौर पर माना जाता था कि जंगल के बाहर निकलने वाले सिंह पालतू पशुओं का शिकार करके अपना पेट भरते हैं। नए शोध के मुताबिक तटीय क्षेत्रों के सिंह पालतू पशुओं की तुलना में वन्यजीवों का अधिक शिकार करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय पीयर-रिव्यूड जर्नल ‘कंजर्वेशन’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार तटीय क्षेत्रों में सिंहों के कुल शिकार से मिलने वाले बायोमास में करीब 70% हिस्सा वन्यजीवों का है। इनमें नीलगाय और जंगली सूअर प्रमुख शिकार हैं, जबकि आवारा पशुओं की हिस्सेदारी करीब 31% रही।
160 सैंपल से सामने आया शिकार का पैटर्न
अध्ययन के लिए मार्च-अप्रैल 2024 में जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर और पोरबंदर के तटीय क्षेत्रों से सिंहों के 160 मल नमूने एकत्र किए गए। इनके विश्लेषण में सामने आया कि सिंहों के आहार में करीब 64% हिस्सा नीलगाय और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों का, जबकि करीब 31% हिस्सा आवारा पशुओं का था।
शोध के मुताबिक नीलगाय अकेले सिंहों द्वारा खाए गए कुल बायोमास का 51% हिस्सा है। जंगली सूअर दूसरा प्रमुख वन्य शिकार रहा। आवारा पशुओं में गाय और भैंस प्रमुख रहे।
किसानों के लिए प्राकृतिक मददगार
शोधकर्ताओं के अनुसार तटीय क्षेत्रों में सिंहों की मौजूदगी केवल वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका सीधा फायदा किसानों को भी मिल रहा है। सिंह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय और जंगली सूअरों की संख्या को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित कर रहे हैं। इससे खेतों में फसल नुकसान कम होने में मदद मिलती है।
गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि अध्ययन से स्पष्ट है कि गिर के बाहर रहने वाले सिंह नीलगाय और जंगली सूअर जैसे फसल नुकसान पहुंचाने वाले वन्यजीवों का शिकार कर किसानों को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचा रहे हैं।
गुजरात में 891 एशियाई सिंह
वर्ष 2025 की 16वीं सिंह गणना के अनुसार गुजरात में एशियाई सिंहों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है। इनमें करीब 100 सिंह सौराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में विचरण कर रहे हैं। यह विस्तार गिर संरक्षित क्षेत्र से बाहर सिंहों के लिए उपयुक्त आवास और बेहतर पारिस्थितिक स्थिति का संकेत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एशियाई सिंहों के दीर्घकालीन संरक्षण के लिए ‘प्रोजेक्ट लायन’ शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में गुजरात सरकार द्वारा किए जा रहे वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के बीच यह अध्ययन सिंहों के बदलते आवास और उनके प्राकृतिक भोजन की महत्वपूर्ण तस्वीर सामने लाता है।
