नई दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने संबोधन में जी-7 देशों की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एकतरफ़ा प्रतिबंध, संरक्षणवाद और मुद्रा को हथियार बनाने की प्रवृत्ति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा ख़तरा बन चुकी है।
मुख्य बिंदु
- सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर बल
- भुगतान प्रणालियों में विकल्प तैयार करने का प्रस्ताव
- ऊर्जा आपूर्ति को राजनीति से अलग रखने की अपील
भारत की स्थिति
भारत ने इस बहस में संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि ब्रिक्स किसी समूह के विरुद्ध नहीं, बल्कि विकासशील देशों की साझा प्राथमिकताओं के लिए काम करने वाला मंच है। भारतीय पक्ष ने व्यापार सुगमता और निवेश प्रवाह को प्राथमिकता देने की बात कही।
विश्लेषकों का कहना है कि सम्मेलन के संयुक्त घोषणापत्र की भाषा पर सबकी नज़र रहेगी, क्योंकि सदस्य देशों के हित हर मुद्दे पर एक जैसे नहीं हैं।
