18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अध्यक्षता का एजेंडा सामने रखा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स की ताक़त उसकी विविधता में है और समूह को टकराव नहीं, संवाद और सहयोग का मंच बने रहना चाहिए।
भारत का ज़ोर किन मुद्दों पर
- सुधारवादी बहुपक्षवाद — वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की हिस्सेदारी
- आपूर्ति शृंखलाओं की मज़बूती और खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा
- डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और तकनीक तक समान पहुंच
- आतंकवाद के विरुद्ध बिना किसी दोहरे मापदंड के साझा कार्रवाई
द्विपक्षीय कूटनीति
सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री ने कई राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात की। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ बैठक में निवेश और ऊर्जा साझेदारी पर चर्चा हुई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने संबोधन में जी-7 की नीतियों पर निशाना साधते हुए बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत की।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस मंच का इस्तेमाल पश्चिम और पूरब — दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाने में कर रहा है।