लद्दाख में छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग पर वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में भी सरगर्मी बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से तत्काल बातचीत बहाल करने की मांग की है, वहीं सरकार का कहना है कि संवाद के दरवाज़े कभी बंद नहीं हुए।
विपक्ष के तर्क
- स्थानीय आबादी की सांस्कृतिक और भूमि संबंधी चिंताओं पर ठोस आश्वासन ज़रूरी
- रोज़गार और भर्ती को लेकर स्पष्ट रोडमैप की मांग
- आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की अपील
सरकार का पक्ष
सरकारी सूत्रों के मुताबिक बुनियादी ढांचे, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम तेज़ी से आगे बढ़ा है। संवैधानिक दर्जे से जुड़े सवालों पर उच्चस्तरीय समिति विचार कर रही है और किसी भी निर्णय में स्थानीय हितों का ध्यान रखा जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सर्दियों से पहले यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, इसलिए दोनों पक्षों के लिए बीच का रास्ता निकालना ज़रूरी है।