अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को अपने चंद्रमा आधार (मून बेस) कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया है। यह भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग में एक नया अध्याय माना जा रहा है।
सहयोग की संभावित दिशाएं
- चंद्रमा की सतह पर दीर्घकालिक ठिकाने के लिए तकनीक विकास
- साझा वैज्ञानिक प्रयोग और उपकरणों की अदला-बदली
- लैंडिंग और नेविगेशन तकनीक में अनुभव साझा करना
- अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में सहयोग
भारत की स्थिति मज़बूत
चंद्रयान मिशनों की सफलता के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र को लेकर भारत के पास बहुमूल्य वैज्ञानिक आंकड़े हैं। यही अनुभव भारत को अंतरराष्ट्रीय साझेदारी में मज़बूत स्थिति देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कार्यक्रमों में भागीदारी से घरेलू अंतरिक्ष उद्योग और स्टार्टअप्स को भी नए अवसर मिलेंगे।