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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

वेस्टर्न रेलवे में अधिकारियों और सप्लायर की कथित मिलीभगत! इम्पोर्टेड ड्रग कोटेड बैलून के नाम पर सप्लाई किया लोकल कंपनी का मेडिकल डिवाइस,फर्जी OEM सर्टिफिकेट के सहारे हासिल किया लाखों का टेंडर! रेलवे को करीब ₹22,79,970 का नुकसान !

 फर्जी OEM सर्टिफिकेट के सहारे हासिल किया लाखों का टेंडर! रेलवे को करीब ₹22,79,970 का नुकसान !आज हम आपके सामने पश्चिम रेलवे और उसके ठेकेदार से जुड़ा एक ऐसा मेडिकल घोटाला उजागर करने जा रहे हैं, ज…

वेस्टर्न रेलवे में अधिकारियों और सप्लायर की कथित मिलीभगत!  इम्पोर्टेड ड्रग कोटेड बैलून के नाम पर सप्लाई किया लोकल कंपनी का मेडिकल डिवाइस,फर्जी OEM सर्टिफिकेट के सहारे हासिल किया लाखों का टेंडर! रेलवे को करीब ₹22,79,970 का नुकसान !
इस फर्जी OEM सर्टिफिकेट के सहारे हासिल किया गया टेंडर! CDSCO रिकॉर्ड में Concept Medical का यह ब्रांड दर्ज नहीं, फिर OEM सर्टिफिकेट कैसे मिला?

 आज हम आपके सामने पश्चिम रेलवे और उसके ठेकेदार से जुड़ा एक ऐसा मेडिकल घोटाला उजागर करने जा रहे हैं, जिसे जानकर आपका माथा ठनक जाएगा! कमीशनखोरी और अंधाधुंध कमाई के चक्कर में ये लोग रेलवे के अपने ही अधिकारियों और कर्मचारियों की जान की परवाह तक नहीं कर रहे हैं।

मामला दिल की नसों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले Drug Coated Balloon की खरीद का है। वेस्टर्न रेलवे ने कुछ समय पहले मुंबई का एक रेलवे अस्पताल  के लिए उच्च गुणवत्ता वाला इम्पोर्टेड मेडिकल डिवाइस खरीदने हेतु टेंडर जारी किया था। बाद में कमीशनखोरी के लालच में संबंधित अधिकारियों और सप्लायर ने मिलीभगत कर इम्पोर्टेड डिवाइस की जगह स्थानीय ब्रांड का डिवाइस सप्लाई कर दिया और बिल इम्पोर्टेड कंपनी के उत्पाद के नाम पर पास करवाकर कमीशनखोरी के खेल में सरकारी धन को नुकसान पहुँचाया।

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम रेलवे ने Drug Coated PTCA Balloon (Sirolimus) की खरीद के लिए 20/11/2025 को Tender No. 29252129 जारी किया था। इस टेंडर में दो कंपनियों AADVENT-Mumbai  और MAP CHEM Pvt. Ltd.-Mumbai  ने हिस्सा लिया था   Financial Tabulation के अनुसार AADVENT-Mumbai ने सबसे कम यानी L1 के रूप में ₹58,23,930 की  बोली लगाई थी। वहीं MAP CHEM Pvt. Ltd.-Mumbai ने ₹81,03,900 की बोली लगाई थी।दोनों कंपनियों की बोली में करीब ₹22,79,970 का अंतर था।

इम्पोर्टेड ड्रग कोटेड के नाम पर चिपका दिया लोकल ब्रांड ! 

टेंडर फाइल करने वाली  MAP CHEM Pvt. Ltd. ने अमेरिकी कंपनी Concept Medical के Drug Coated PTCA Balloon (Sirolimus) की आपूर्ति करने का करार पेश किया। इसके समर्थन में कंपनी ने टेंडर के साथ Concept Medical का OEM Authorization Certificate भी जमा किया। लेकिन RTI से मिले दस्तावेजों में जो जानकारी सामने आई, वह चौंकाने वाली है। जिस Concept Medical Research Pvt. Ltd. के नाम पर OEM Authorization Letter दिया गया, वह न तो इस उत्पाद की निर्माता है और न ही आयातक। वहीं, Magic Touch ब्रांड का असली मालिक और लाइसेंसधारक Envision Scientific Pvt. Ltd.surat  है। यानी टेंडर में जिस कंपनी के नाम का सहारा लेकर Magic Touch ब्रांड का OEM Authorization Letter पेश किया गया, Concept Medical न तो Magic Touch ब्रांड के इस उत्पाद का निर्माण करती है और न ही इसका आयात करती है। CDSCO की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड देखेंगे, तो इस पूरे मामले की हकीकत और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सवाल साफ हो जाएंगे।

टेंडर खुलने से 54 दिन पहले ही सेटिंग का खेल ! OEM लेटर ने खोल दी पोल

पश्चिम रेलवे के स्टोर विभाग में सेटिंग का खेल ऐसा हुआ कि MAP CHEM Pvt. Ltd अपने ही जमा किए OEM Certificate में फंस गई। 27 सितंबर 2025 को जारी OEM लेटर में टेंडर नंबर और 20 नवंबर 2025 की प्रकाशन तिथि  पहले से दर्ज थी। यानी टेंडर खुलने से 54 दिन पहले ही ठेकेदार के पास टेंडर नंबर और तारीख वाला लेटर मौजूद था। सवाल सीधा है—टेंडर जारी होने से पहले ही यह सब कैसे तय हो गया? क्या खरीद, रेट और कमीशन का खेल पहले से सेट था? 

स्टोर अधिकारी अमन जैन की भूमिका सवालों के घेरे में”

पश्चिम रेलवे के इस पूरे टेंडर को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी स्टोर विभाग के अधिकारी अमन जैन (SMM-P/S) की थी। पूरे टेंडर में उनकी भूमिका संदिग्ध नजर आती है। क्या अमन जैन नीचे लिखे सवालों के जवाब देंगे? 

CDSCO से क्रॉस-चेक क्यों नहीं किया? Magic Touch ब्रांड का असली मालिक कौन है और उत्पाद का निर्माता व आयातक कौन है, इसकी जांच क्यों नहीं की गई?

  • 54 दिन पहले जारी OEM लेटर क्यों नजरअंदाज किया? 27 सितंबर 2025 के लेटर में 20 नवंबर 2025 को प्रकाशित होने वाले टेंडर का नंबर और तारीख पहले से कैसे दर्ज थी? इस विसंगति पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • L1 कंपनी को क्यों ठुकराया? जब AADVENT ने ₹58.23 लाख की सबसे कम बोली लगाई थी, तो MAP CHEM की ₹81.03 लाख की बोली पर खरीद क्यों की गई?
  • ₹22.80 लाख ज्यादा खर्च क्यों हुए? रेलवे को कम कीमत पर खरीद का विकल्प छोड़कर इतनी अधिक कीमत पर खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी? 

शिशिर कुमार राउल  के तकनीकी फैसले पर उठे सवाल, L1 को बाहर कर L2 को बताया योग्य

 

पश्चिम रेलवे के इस मेडिकल टेंडर में सबसे अहम फैसला ACM/ACHDCardio Shishir Kumar Roul की Technical Scrutiny के बाद सामने आया। 31 दिसंबर 2025 की रिपोर्ट पर उनके डिजिटल हस्ताक्षर हैं, जिसमें सबसे कम दर वाली AADVENT-Mumbai (L1) को Unsuitable घोषित किया गया, जबकि अधिक कीमत वाली MAP CHEM Pvt. Ltd. (L2) को Technically Suitable बताया गया।

यही फैसला अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि L1 कंपनी की बोली करीब ₹22.80 लाख कम थी। ऐसे में तकनीकी आधार पर L1 को बाहर करने और L2 को योग्य घोषित करने का निर्णय संदेह पैदा करता है और इसकी विस्तृत जांच की जरूरत है। 

यह पूरा मामला एक सुनियोजित घोटाले की ओर इशारा करता है। जिन अधिकारियों पर रेलवे और विभाग को सुचारू रूप से चलाने तथा सरकारी खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी है, यदि वही कमीशनखोरी में संलिप्त पाए जाते हैं, तो रेलवे की व्यवस्था कैसे चलेगी?

आखिर जनता के टैक्स का पैसा इस तरह बर्बाद होने से कौन रोकेगा? अब देखना यह है कि पश्चिम रेलवे के आला अधिकारी इस खबर पर क्या संज्ञान लेते हैं और मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं।

अगर ऐसे मामलों में जवाबदेही तय नहीं हुई, तो जनता की गाढ़ी कमाई इसी तरह बर्बाद होती रहेगी। अब फैसला रेलवे के आला अधिकारियों के हाथ में है—कार्रवाई होगी या सरकारी खरीद में उठते ऐसे सवाल यूं ही अनुत्तरित रहेंगे?

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