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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

द्वारका में बनेगा भव्य श्रीकृष्ण संग्रहालय, आधुनिक तकनीक से जीवंत होंगी कान्हा की लीलाएँ

गांधीनगर, 22 अक्टूबर। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका में आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम आकार लेने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को आगे बढ़ात…

द्वारका में बनेगा भव्य श्रीकृष्ण संग्रहालय, आधुनिक तकनीक से जीवंत होंगी कान्हा की लीलाएँ

गांधीनगर, 22 अक्टूबर। भगवान श्रीकृष्ण की नगरी द्वारका में आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम आकार लेने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार 92.70 करोड़ रुपये की लागत से श्रीकृष्ण संग्रहालय विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों, दर्शन और श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश को नई पीढ़ी तक आधुनिक और रोचक तरीके से पहुँचाना है।

नौ गैलरियों में दिखेगी श्रीकृष्ण की जीवन यात्रा

द्वारकाधीश मंदिर से लगभग 1.6 किलोमीटर दूर बनने वाले इस संग्रहालय में नौ थीम आधारित गैलरियाँ होंगी। इनमें श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीलाओं, गोकुल-वृंदावन के प्रसंगों, गोवर्धन पर्वत धारण करने, कालिया नाग मर्दन, रासलीला, कंस वध, द्वारका की स्थापना और महाभारत में उनकी भूमिका को प्रस्तुत किया जाएगा।

मूर्तियों, चित्रों, कलाकृतियों और प्रतिकृतियों के साथ इन प्रसंगों को इस तरह प्रदर्शित करने की योजना है कि आगंतुक श्रीकृष्ण के जीवन और उपदेशों को केवल जानें ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़ाव भी महसूस कर सकें।

डिजिटल तकनीक से मिलेगा नया अनुभव

संग्रहालय में इमर्सिव ऑडियो-विजुअल प्रस्तुतियाँ, इंटरएक्टिव डिजिटल डिस्प्ले, 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग, टचस्क्रीन कियोस्क और मोशन सेंसर जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अलावा लाइट एंड साउंड शो, एम्फीथिएटर, विशेष लैंडस्केप और कमल तालाब भी विकसित किए जाएँगे।

आगंतुकों की सुविधा के लिए कैफे, स्मृति चिह्नों की दुकान, डिजिटल सूचना केंद्र, दिव्यांगजनों के अनुकूल सुविधाएँ और पार्किंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

द्वारका पहले से ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल है। श्रीकृष्ण संग्रहालय इस पहचान को सांस्कृतिक और शैक्षणिक पर्यटन से जोड़ सकता है। इससे स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प, व्यापार और आतिथ्य क्षेत्र में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

यह परियोजना गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक स्वरूप में प्रस्तुत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ इतिहास, आध्यात्मिकता और तकनीक के माध्यम से श्रीकृष्ण का संदेश नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।

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गहरी खोज न्यूज़ डेस्क · न्यूज़ डेस्क, Gahari Khoj News

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