भाजपा के सिर ताज
- इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }: पांच राज्यों में चुनाव परिणामों को देखें तो स्पष्ट है कि पं. बंगाल की ऐतिहासिक जीत के साथ-साथ असम और पुडुचेरी में पुनः सत्ता में लौटने का अर्थ यही है कि भाजपा के सिर ताज मतदाता ने रखा है। एग्जिट पोल के अनुसार असम और पुडुचेरी में भाजपा की वापसी के साथ पं. बंगाल में टीएमसी और भाजपा में कांटे की टक्कर बताई जा रही थी। लेख लिखने तक पं. बंगाल में भाजपा 207 और तृणमूल कांग्रेस 80 के आंकड़े पर थी। पं. बंगाल में पहली बार कमल का खिलना भारतीय जनता पार्टी की एक ऐतिहासिक जीत ही है। जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा को लेकर जनसंघ से भारतीय जनता पार्टी बनी पार्टी की जीत अपने संस्थापक के प्रति एक श्रद्धांजलि भी है। पं. बंगाल की भूमि से हिन्दुत्व व राष्ट्र प्रेम को लेकर इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखे नामों में श्री अरविंद राम कृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद वंदेमातरम के रचयेता बंकिम चन्द्र चटर्जी देश के लिए शहीद होने वाले खुदी राम बोस और देश की आजादी के लिए ‘आजाद हिन्द फौज’ बनाने वाले सुभाष चन्द्र बोस को भी एक नमन भेंट बंगालियों की तरफ से है।
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में देश व दुनिया की नजर पं. बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणामों पर ही टिकी हुई थी, क्योंकि पं. बंगाल के चुनाव परिणाम प्रदेश के साथ-साथ देश हित से भी जुड़ा हुआ है। ममता की सरकार के समय जिस तरह मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण हिन्दू संस्कृति के साथ-साथ देश हित विरुद्ध घुसपैठियों के मुद्दों की अनदेखी हो रही थी और हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे थे, कानून व्यवस्था लड़खड़ा चुकी थी। उपरोक्त कारणों के चलते पं. बंगाल में भय का माहौल बन चुका था। 2021 के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं व नेताओं के घरों पर हुए हमले, महिलाओं के साथ हुए अत्याचार की घटनाओं के कारण प्रदेश में भाजपा मतदाता सहमा हुआ था। बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्ता पलट के बाद जो कुछ बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ वहां हुआ उसे देख पं. बंगाल का हिन्दू भी ममता की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के कारण सहम और भयग्रस्त हो गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने वहां के मतदाता को भरोसा दिया कि सत्ता में आए तो गुंडों को उलटा टांग देंगे और घुसपैठियों को बाहर निकाल देंगे। इसके साथ वहां चुनावों के दौरान और परिणाम आने के बाद तक सुरक्षा बलों को तैनात रखा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पं. बंगाल में की रैलियों ने भी हिन्दू मतदाता को भयमुक्त होकर मतदान करने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा संगठन स्तर पर भाजपा के नेताओं ने योजनाबद्ध तरीके से पिछले लम्बे समय से वहां रह कर जो भरोसा व उत्साह कार्यकर्ता व मतदाता को दिया उसका फल भी चुनावी परिणाम के रूप में आज सामने आया है।
भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद के लिए बंगाल की धरती से सदियों से एक के बाद एक बुलंद आवाज उठती रही है लेकिन आजादी के बाद उसी बंगाल में तुष्टिकरण और वामपंथियों के कारण भारतीय संस्कृति के प्रति उदासीनता दिखाई गई। 7 दशक के बाद पं. बंगाल में हिन्दुत्व व राष्ट्रवाद की सोच को लेकर चलने वाली भाजपा पहली बार सरकार बनाने जा रही है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जो सपना देखा था आज भाजपा ने वह पूरा कर दिया है। धारा 370 पहले समाप्त की जा चुकी है। केन्द्र के बाद पं. बंगाल में सत्ता में आ गई है। पं. बंगाल और असम की जीत ने राष्ट्रीय राजनीति में आ रहे परिवर्तन पर एक प्रकार से मोहर लगा दी है। पं. बंगाल में 92 प्रतिशत से अधिक मतदान से यह भी स्पष्ट हो गया है कि हिन्दू मतदाता हिंसा में नहीं लोकतांत्रिक ढंग से परिवर्तन में यकीन रखता है।
पं. बंगाल, असम और पुडुचेरी में मिली जीत से भाजपा की जिम्मेवारी भी बढ़ गई है। केरल में कांग्रेस का सहयोगियों संग सत्ता में आना उसके लिए एक और जीवनदान की तरह ही है। तमिलनाडु में डीएमके की हार से स्पष्ट है कि देश में सनातन का विरोध करने वाले या गाली देने वाले अब सत्ता में आने वाले नहीं। यह जीत प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह के प्रति मतदाता के भरोसे को भी दर्शाती है।
