हादसों का एक कारण हादसे से सबक न लेना भी है
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: हादसा फैक्ट्री में हो, सड़क पर हो, पानी में हो ,मेले में हो, कहीं भी हो उसके अनेक कारण होते हैं लेकिन एक कारण जरूर लापरवाही होती है। जरा की किसी एक या अधिक लोगों की लापरवाही के कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं और लोगों की जान जाती रहती है,परिवार,समाज व देश को जनहानि होती रहती है।ऐसा भी नहीं है कि कोई हादसा पहली बार होता इसलिए कहा जाए कि पहली बार हुआ इसलिए लोग सावधान नहीं थे और सावधान न होने के कारण मारे गए। हर तरह के हादसे होते हैं,कई हादसे तो रोज होते हैं, कई हादसे,कई हादसे हर सप्ताह होते हैं,कई हादसे हर महीने होते हैं,कई हादसे तो हर साल होते हैं लेकिन उससे मनुष्य,उसका परिवार, समाज,संस्थाएं और सरकार कोई सबक नहीं लेती है। हादसे से अगर सबक लिया जाता तो एक हादसे के बाद दूसरा हादसा नहीं होता। दूसरा,तीसरा आजादी के पचास सालों में कई,सैकड़ों,हजारों हादसे हो चुके हैं, आगे भी होंगे तो इसीलिए होंगे कि इससे हम कोई सबक नहीं लेते हैं।
राज्य के वेदांता की फैक्ट्री में बायलर फटने से २५ श्रमिकों की मौत हुई है।इससे पहले हुए बड़े हादसों को याद करें तो २००९ में बालकों कोरबा में २४० मीटर ऊंची चिमनी गिरने से ४० मजदूरों की मौत हुई थी,२००६ में बलौदाबाजार में स्थित एक इस्पात प्लांट में डस्ट सेटलिंग चेंबर में हुए विस्फोट के कारण७ मजदूरों की मौत हो गई थी।२०२५ में रायपुर के सिलतरा स्थित गोदावरी स्टील प्लांट में छत गिरने से ६ मजदूरों की मौत हो गई थी।२०२४ में सरगुजा के एलुमिनियम प्लांट में कोयले से भरा कन्वेयर गिर जाने से ४ मजदूरों की मौत हो गई थी।उद्योंगो को मजदूरों की सुरक्षा के सभी प्रबंधन किए जाने चाहिए लेकिन किए नहीं जाते हैं,इससे मजदूरों की जान जाती है।श्रम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में ३३.२९ लाख से अधिक पंजीकृत श्रमिक हैं, बीते तीन सालों में हुए औद्योगिक हादसों में ३२१ श्रमिकों की मौत हो चुकी है।राज्य में हर तीसरे दिन एक श्रमिक की मौत किसी लापरवाही की वजह होती है।हर हादसे के बाद औद्योगिक स्वास्थ्य सुरक्षा विभाग सभी नियमों का पालन करने का निर्देश देता है लेकिन औद्योगिक संस्थानों की नियमित मानिटरिंग न होने से नियमों का पालन होता नहीं है और परिणाम मजदूरों की मौत होती है।
हाल ही में कांकेर जिले में सरेंडर कर चुके नक्सलियों की सूचना पर जंगल मे डंप विस्फोटक सामान को ढूंढकर उसे नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी तरह के प्रयास में नारायणपुर जिले की सीमा में शनिवार को अदनार में पांच बोरियों में १५-५ किलो पटाखा बारुद मिला और उसे नष्ट किया जाना था,लेकिन नष्ट करने से पहले विस्फोट हो जाने से चार लोगों मौके पर ही मौत हो गई।ऐसा नहीं है कि पहली बार ऐसा किया जा रहा था, इससे पहले नक्सलियों द्वारा लगाए गए बारुंदी सुरंग व विस्फोटक साम्रमी तलाश कर उसे कई बार नष्ट किया जा चुका है। इस बार भी ऐसा किया जाना था लेकिन विस्फोट हो गया और विस्फोट के विषय में यह कहा जा रहा है कि तापमान अधिक होने और केमिकल रियेक्शन होने के कारण विस्फोट हो गया। सही में हुआ क्या है, इसका पता तो जांच से चलेगा लेकिन यह तो साफ है कि हमेशा की तरह सुरक्षा के तमाम उपायों पर अमल नहीं किया गया। कहीं तो चूक हुई है।ऐसे मामलों में जरा सी चूक भारी पड़ती है और विस्फोटक को नष्ट करने वालेे ही मारे जाते हैं।
एक ही तरह की घटना दोबारा होती है तो उससे साफ हो जाता है कि पहले हुई घटना से कोई सबक नहीं लिया गया है। बस्तर के पहले कुछ महीनों पहले जम्मू कश्मीर के नौगाम पुलिस थाने में इसी तरह दूसरी जगह से लाकर थाने के मैदान में रखे २६० किलो विसफोटक में विस्फोट हुआ। तब मौके पर ९लोग मारे गए थे और ३२ लोग घायल हुए थे। तब भी यही कहा गया कि विस्फोटकों का सैंपल लेते वक्त अचानक कैमिकल रियेक्शन होने की वजह से विस्फोट हुआ था।किसी भी तरह का विस्फोटक पदार्थ हो, वह ठोस हो या तरल हो उसे नष्ट करने वालों को तो पता रहता है कि इनको रखते वक्त, कहीं से लाते वक्त क्या क्या सावधानी रखनी होती है। इसके बाद भी एक हादसे के बाद दूसरा हादसा होता है तो साफ है कि जो सावधानी विस्फोटकों को हैंडल करते वक्त बरती जानी चाहिए नही बरती जा रही है। एक हादसे के महीनों बाद वैसा ही दूसरा हादसा हो रहा है। हादसा कहीं भी तो उससे नुकसान तो परिवार,समाज,प्रदेश व देश को ही होता है। इसे रोकना सामूहिक जिम्मेदारी है।सभी सावधान रहेंगे तो ऐसे हादसों से बचा जा सकता है कोई एक भी असावधान हुआ तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे।
बस्तर में तो अभी नक्सलवाद समाप्त हुआ है। सरेंडर किए नक्सलियों से सूचना मिल रही है कि नक्सलियों ने कहां पर विस्फोटक छिपा कर रखा है, कहां कहां पर बारूदी सुरंगे बिछाई गई हैं। कहां हथियार छिपा कर रखे गए हैं। यह सिलसिला अभी महीनों चल सकता है।जब तक सभी हथियार,विस्फोटक सामग्री तलाश कर नष्ट नहीं कर दी जाती है, विस्फोट में आम लोगों को मारे जाने का अंदेशा बना रहेगा। सरकार की पूरी कोशिश है कि बस्तर में जहां कहीं भी बारूदी सुरंगे बिछाई गई है, उसे तलाश कर नष्ट कर दिया जाए ताकि नक्सलियों के अंत बाद भी बस्तर में कोई मारा न जाए। आने वाले दिनों में बस्तर में बारूद व विस्फोटक सामग्री मिलेगी इसलिए इस बार हुए हादसे से सबक लेने की जरूरत है ताकि फिर ऐसी घटना न हो और जवान हादसे में न मारे जाएं।
