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रविवार, 13 सितंबर 2026

सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण, भारी प्रक्षेपण यानों की राह होगी आसान

स्वदेशी इंजन तकनीक से भविष्य के मिशनों में बढ़ेगी पेलोड क्षमता

सेमी-क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण, भारी प्रक्षेपण यानों की राह होगी आसान
स्वदेशी इंजन तकनीक से भविष्य के मिशनों में बढ़ेगी पेलोड क्षमता (फ़ोटो: ISRO, GODL-India, Wikimedia Commons)

इसरो ने सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के फुल-थ्रस्ट परीक्षण में सफलता हासिल की है। यह तकनीक भविष्य के भारी प्रक्षेपण यानों के लिए अहम मानी जा रही है।

क्यों अहम है यह तकनीक

  • अधिक पेलोड को भू-स्थिर कक्षा तक पहुंचाने की क्षमता
  • ईंधन के रूप में परिष्कृत केरोसिन का उपयोग — अपेक्षाकृत सुरक्षित और किफ़ायती
  • प्रति किलोग्राम प्रक्षेपण लागत घटने की संभावना
  • भविष्य के मानव मिशनों और गहरे अंतरिक्ष अभियानों में उपयोगी

आत्मनिर्भरता की दिशा में

अब तक भारी प्रक्षेपण के लिए भारत को कई तकनीकों पर सीमित विकल्पों के साथ काम करना पड़ता था। स्वदेशी सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के विकसित होने से यह निर्भरता घटेगी और वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाज़ार में भारत की स्थिति मज़बूत होगी।

वैज्ञानिकों के मुताबिक परीक्षणों की एक शृंखला के बाद ही इसे उड़ान के लिए प्रमाणित किया जाएगा।

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राहुल देशमुख · संवाददाता — खेल व तकनीक

खेल, तकनीक और विज्ञान की खबरों पर रिपोर्टिंग। आंकड़ों और तथ्यों पर आधारित लेखन में रुचि।

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