उपग्रहों से मिलने वाले आंकड़े अब सिर्फ़ मौसम पूर्वानुमान तक सीमित नहीं रहे। भारत में फ़सल क्षेत्र के अनुमान, सूखे की चेतावनी और फ़सल बीमा के दावों के निपटारे तक — हर जगह रिमोट सेंसिंग का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है।
कहां हो रहा उपयोग
- बुवाई क्षेत्र और फ़सल की सेहत का आकलन
- सूखा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की तेज़ पहचान
- बीमा दावों के लिए वस्तुनिष्ठ प्रमाण
- जल संसाधनों और भूजल पुनर्भरण की निगरानी
किसानों तक पहुंच ज़रूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इन आंकड़ों का असली फ़ायदा तभी है जब ये सरल भाषा में, मोबाइल पर और स्थानीय बोली में किसान तक पहुंचें। कई राज्यों में सलाह सेवाएं इसी दिशा में काम कर रही हैं।
तकनीक के साथ ज़मीनी सत्यापन भी उतना ही ज़रूरी है, ताकि आंकड़ों और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर न रह जाए।