गांधीनगर, 8 अक्टूबर: गुजरात सरकार पोरबंदर जिले के मोचा गांव में ₹100 करोड़ की लागत से मरीन बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन कॉरिडोर (एम-ब्रिक) विकसित करेगी। इसके लिए 9 अक्टूबर को भावनगर में गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन (GSBTM) और CSIR-CSMCRI के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
30 एकड़ में बनेगा हब
मोचा में बनने वाला यह केंद्र करीब 30 एकड़ में विकसित होगा। इसमें 10 एकड़ में रिसर्च कैंपस और 20 एकड़ में औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। यहां समुद्री शैवाल, माइक्रोएल्गी और समुद्री सूक्ष्मजीवों पर शोध के साथ प्रोसेसिंग, बायोमैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज और गुणवत्ता नियंत्रण जैसी सुविधाएं विकसित होंगी।
सीवीड से बनेंगे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट
कॉरिडोर के जरिए समुद्री संसाधनों से बायोफर्टिलाइजर, बायोस्टिमुलेंट्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, कॉस्मेस्यूटिकल्स, एक्वाफीड, एंजाइम और अन्य समुद्री उत्पाद विकसित करने पर जोर रहेगा। सीवीड प्रोसेसिंग के लिए अलग क्लस्टर भी बनाया जाएगा।
स्टार्टअप और तटीय समुदायों को मिलेगा लाभ
एम-ब्रिक में स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इनक्यूबेशन तथा पायलट-स्केल बायोप्रोसेसिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही तटीय युवाओं, सीवीड किसानों, मछुआरा समुदाय, महिलाओं और एमएसएमई के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
सरकार के अनुसार, पहले पांच वर्षों में करीब 1,000 से 1,500 लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। इस पहल से समुद्री जैव संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग, नए उद्योगों और तटीय क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
