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सोमवार, 19 अक्टूबर 2026

गुजरात सरकार का बड़ा चैलेंज! पहाड़ों की ऊंचाई तक पहुंचेगा पानी : ₹1,331 करोड़ की दमण-गंगा योजना को मंजूरी, 46 गांवों और 17,000 हेक्टेयर खेतों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

गुजरात के आदिवासी अंचल में बदलेगी खेती की तस्वीर! ₹1,331 करोड़ की दमण-गंगा योजना को मंजूरीवलसाड के धरमपुर और कपराडा के 46 गांवों को मिलेगा लाभ, 17,000 हेक्टेयर कृषि भूमि तक पहुंचेगा सिंचाई का पानीगां…

गुजरात सरकार का बड़ा चैलेंज! पहाड़ों की ऊंचाई तक पहुंचेगा पानी  :  ₹1,331 करोड़ की दमण-गंगा योजना को मंजूरी, 46 गांवों और 17,000 हेक्टेयर खेतों को मिलेगा सिंचाई का लाभ

 

गुजरात के आदिवासी अंचल में बदलेगी खेती की तस्वीर! ₹1,331 करोड़ की दमण-गंगा योजना को मंजूरी

वलसाड के धरमपुर और कपराडा के 46 गांवों को मिलेगा लाभ, 17,000 हेक्टेयर कृषि भूमि तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी

गांधीनगर, 10 अक्टूबर। गुजरात के पहाड़ी और आदिवासी बहुल इलाकों में खेती को नई ताकत देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दमण-गंगा लिफ्ट इरीगेशन योजना को प्रशासनिक मंजूरी दी है। करीब 1,331.30 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के जरिए वलसाड जिले की धरमपुर और कपराडा तहसीलों में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाएगा। इससे लगभग 17,000 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को लाभ मिलने की उम्मीद है।

 

पहाड़ों की ऊंचाई तक पंपिंग से पहुंचेगा पानी

दक्षिण गुजरात के इन पहाड़ी क्षेत्रों में लंबे समय से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी की कमी रही है। ऊंचाई अधिक होने के कारण यहां सामान्य नहर व्यवस्था से पानी पहुंचाना मुश्किल है। इस समस्या को दूर करने के लिए मधुबन जलाशय से अतिरिक्त पानी को आधुनिक पंपिंग सिस्टम के जरिए ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

परियोजना के तहत करीब 53 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन और 188 किलोमीटर से अधिक लंबी शाखा एवं फीडर पाइपलाइन बिछाई जाएगी। पानी को अलग-अलग पंपिंग स्टेशनों के माध्यम से ऊंचाई तक पहुंचाया जाएगा, जिसके बाद वितरण नेटवर्क के जरिए संबंधित क्षेत्रों में इसकी आपूर्ति होगी।

46 गांवों के जलस्रोतों को भी मिलेगा सहारा

इस योजना से कपराडा के 28 गांवों और धरमपुर-कपराडा क्षेत्र के अन्य 17 गांवों को लाभ पहुंचाने का प्रावधान है। परियोजना के अंतर्गत कुल 46 गांवों को सीधे लाभ मिलने का उल्लेख किया गया है।

खास बात यह है कि पानी का उपयोग केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के तहत 26 ग्राम तालाबों और 81 चेकडैमों में भी पानी छोड़ा जाएगा। इससे भूजल स्तर में सुधार, जलसंचय क्षमता बढ़ाने और खेती के महत्वपूर्ण समय में पानी की उपलब्धता बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

हर साल 122.33 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का लक्ष्य

परियोजना की निर्धारित क्षमता 500 क्यूसेक होगी। सालाना 100 दिनों के संचालन के दौरान पानी का वितरण तय रोटेशन के अनुसार किया जाएगा। इसके लिए दो जोन बनाए गए हैं, जिनमें क्रमशः 320 और 180 क्यूसेक पानी आवंटित करने की योजना है।

सरकारी योजना के अनुसार, मधुबन जलाशय से प्रतिवर्ष लगभग 122.33 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध कराने की अपेक्षा है। इसके साथ ही पानी के प्रवाह और दबाव पर नजर रखने के लिए आधुनिक ऑटोमेशन तथा SCADA आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।

आदिवासी किसानों के लिए क्यों अहम है यह परियोजना?

धरमपुर और कपराडा के किसानों को सिंचाई के लिए काफी हद तक सीमित जल संसाधनों और भूजल पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यह परियोजना पानी की उपलब्धता बढ़ाने, कृषि उत्पादन को सहारा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में जलसंसाधनों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

दमण-गंगा लिफ्ट इरीगेशन योजना का उद्देश्य स्पष्ट है—पहाड़ी इलाकों तक पानी पहुंचाना, खेतों की सिंचाई की समस्या कम करना और आदिवासी क्षेत्रों में कृषि के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार करना।

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गहरी खोज न्यूज़ डेस्क · न्यूज़ डेस्क, Gahari Khoj News

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