गुजरात की आंगनवाड़ी बहनों को सम्मानजनक वेतन कब? कांग्रेस ने सरकार को घेरा
कांग्रेस ने राज्य की आंगनवाड़ी व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। पार्टी के अनुसार, गुजरात में कुल 53,029 आंगनवाड़ियां हैं। इनमें 12,642 किराए के मकानों, 8,452 जर्जर इमारतों, 3,381 अस्थायी शेडों और करीब 100 आंगनवाड़ियों के खुले में संचालित होने का दावा किया गया है।
गांधीनगर। गुजरात कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों के साथ आर्थिक अन्याय का आरोप लगाया है। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया कन्वीनर एवं प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने कहा कि पड़ोसी राज्यों की तुलना में गुजरात में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों को मिलने वाला राज्य भत्ता काफी कम है।
डॉ. दोशी के मुताबिक, मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को ₹8,500 और हेल्पर को ₹4,250, महाराष्ट्र में कार्यकर्ता को ₹8,500 और हेल्पर को ₹5,250 तथा राजस्थान में कार्यकर्ता को ₹6,061 और हेल्पर को ₹4,041 राज्य भत्ता दिया जाता है। इसके मुकाबले गुजरात में कार्यकर्ता को ₹5,500 और हेल्पर को ₹3,250 ही राज्य भत्ता मिलता है।
कांग्रेस का आरोप है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों को दिए जाने वाले अतिरिक्त राज्य भत्ते के मामले में गुजरात देश में 16वें स्थान पर है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब अन्य राज्यों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं, तो गुजरात में आंगनवाड़ी बहनों को सम्मानजनक वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा है।
कांग्रेस ने राज्य की आंगनवाड़ी व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल उठाए। पार्टी के अनुसार, गुजरात में कुल 53,029 आंगनवाड़ियां हैं। इनमें 12,642 किराए के मकानों, 8,452 जर्जर इमारतों, 3,381 अस्थायी शेडों और करीब 100 आंगनवाड़ियों के खुले में संचालित होने का दावा किया गया है।
डॉ. दोशी ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण के बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा और बेहतर कार्य परिस्थितियां नहीं मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में कुपोषण और बाल मृत्यु दर की स्थिति भी चिंता का विषय है।
गुजरात कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों के राज्य भत्ते में तत्काल बढ़ोतरी की जाए, उन्हें सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा दी जाए तथा जर्जर एवं असुविधाजनक आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति में सुधार किया जाए।
कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस लेकर उन्हें ‘समान काम, समान वेतन’ के सिद्धांत के अनुरूप न्याय दिया जाए।
