गांवों से कचरा जुटाएंगे लोग, वन विभाग खरीदेगा; 2.94 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट

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गांधीनगर, 11 अगस्त। गुजरात के प्रसिद्ध नल सरोवर पक्षी अभयारण्य को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए वन विभाग ने नई पहल शुरू की है। इसके तहत अभयारण्य के आसपास के गांवों में फेंके गए प्लास्टिक कचरे को स्थानीय लोग एकत्र करेंगे और वन विभाग इस कचरे को निर्धारित कीमत पर खरीदेगा। इसके बाद प्लास्टिक को रिसाइकिल किया जाएगा।

जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से चल रहे ‘प्रोजेक्ट फॉर इको-रिस्टोरेशन इन गुजरात’ (PERG) के तहत इस काम के लिए 2.94 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। वन विभाग का दावा है कि इससे नल सरोवर में पहुंचने वाले प्लास्टिक कचरे पर रोक लगेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

गांवों में रखे जाएंगे कचरा संग्रहण के डिब्बे

अहमदाबाद जिले के विरमगाम तहसील के कायला गांव में प्लास्टिक वेस्ट कलेक्शन सेंटर बनाया गया है। यह प्रोजेक्ट नल सरोवर के आसपास के अहमदाबाद जिले के वेकरिया, कायला, शाहपुर, धारजी और मेणी तथा सुरेंद्रनगर जिले के नानी कठेची और राणागढ़ गांवों को कवर करेगा।

गांवों में प्लास्टिक कचरा जमा करने के लिए डिब्बे लगाए गए हैं। इको-डेवलपमेंट कमेटियां ‘स्वच्छता प्रहरियों’ की नियुक्ति करेंगी। ये प्रहरी ग्रामीणों को सूखा प्लास्टिक अलग करने और उसका उचित निपटान करने के लिए जागरूक करेंगे।

कचरा खरीदकर वन विभाग करेगा रिसाइकिल

जनभागीदारी बढ़ाने के लिए वन विभाग गांवों से एकत्र प्लास्टिक कचरा खरीदेगा। इसके लिए कलेक्शन सेंटर पर शेड, प्रोसेसिंग यूनिट, कंपाउंड वॉल, सिक्योरिटी केबिन, पानी-बिजली की सुविधा, प्लास्टिक वेस्ट प्रोसेसिंग मशीन, सुरक्षा उपकरण और कचरा संग्रहण बिन जैसी सुविधाएं तैयार की गई हैं।

वन विभाग के मुताबिक, प्लास्टिक कचरे के संग्रहण और प्रबंधन में स्थानीय लोगों की भागीदारी से रोजगार भी पैदा होगा।

नल सरोवर में 270 पक्षी प्रजातियां मिलीं

नल सरोवर में वर्ष 2025-26 के दौरान हुई पक्षी गणना में 270 प्रजातियों के करीब 6.42 लाख पक्षी दर्ज किए गए थे। 50 सर्वे जोन में हुई गणना में वर्ष 2023-24 की तुलना में 26 अधिक पक्षी प्रजातियां और करीब 2.28 लाख अधिक पक्षी मिले।

नल सरोवर में यलो-ब्रेस्टेड बंटिंग, सोशिएबल लैपविंग, इंडियन स्किमर, बेअर्स पोचार्ड, डालमेशियन पेलिकन और सारस क्रेन जैसी दुर्लभ एवं संकटग्रस्त प्रजातियां भी देखी गई हैं।

रामसर साइट है नल सरोवर

नल सरोवर को वर्ष 2012 में रामसर साइट का दर्जा मिला था। सेंट्रल एशियन फ्लाईवे पर स्थित यह अभयारण्य मध्य एशिया, साइबेरिया और यूरोप से आने वाले लाखों प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, इस पहल के जरिए नल सरोवर से वैज्ञानिक तरीके से प्लास्टिक कचरा हटाने और अभयारण्य को प्रदूषण से मुक्त करने पर काम किया जाएगा।

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