बीना विधायक के दलबदल मामले पर उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

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सागर{ गहरी खोज }: मध्‍य प्रदेश के सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक श्रीमती निर्मला सप्रे के कथित दलबदल का कानूनी विवाद अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। गुरुवार को मध्य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय में इस संवेदनशील राजनीतिक और कानूनी मामले पर एक बार फिर से गंभीर सुनवाई हुई। कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों की अंतिम दलीलें और लंबी बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में श्रीमती निर्मला सप्रे सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंची थीं। हालांकि, बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। उनके इस कदम के बाद प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया था। निर्मला सप्रे के भाजपा में शामिल होने के बाद भी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा न देने पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया था। मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उच्‍च न्‍यायालय में एक रिट (याचिका) दायर कर दलबदल विरोधी कानून के तहत बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता को तुरंत समाप्त (शून्य) करने की मांग की थी।
कांग्रेस से भाजपा में जाने का यह कानूनी विवाद पिछले करीब 702 दिनों से अदालत के गलियारों में लंबित है। याचिकाकर्ता उमंग सिंघार का आरोप रहा है कि नियमों के मुताबिक दल बदलने वाले जनप्रतिनिधि को अपने पद से इस्तीफा देकर दोबारा जनादेश लेना चाहिए, लेकिन इस मामले में लगातार देरी की जा रही है।
गुरुवार को हुई उच्चस्तरीय सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलों को विस्तार से रिकॉर्ड पर लिया। सभी कानूनी पहलुओं और तकनीकी बहस के पूरे होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। अब आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बीना विधायक की सदस्यता बरकरार रहेगी या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा। इस फैसले पर अब पूरे मध्य प्रदेश के राजनेताओं और जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

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