शिक्षक मन परिवर्तन कर राष्ट्र विकास के लिए कार्य करे:राज्यपाल

0
cebd0c40910a77c3856a22b94ed3ab6a

जयपुर{ गहरी खोज }: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि प्रशासनिक पदों पर चयनित अधिकारी पिछडे और कमजोर वर्ग के लोगों की समस्याओं के समाधान का विशेष ध्यान रखें। इसी से जीवन में दुआएं मिलेगी और नाम होगा। उन्होंने कहा कि नए भारत के निर्माण अर्थ है, गांव और गरीब लोगों के लिए समय देकर उनके कार्य करना। राज्यपाल बागडे रविवार को विद्याभारती, राजस्थान द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने समारोह में राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद के 59 नव चयनित और तीन नव चयनित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को सम्मानित किया।
राज्यपाल ने कहा कि आजादी के बाद देश में आदर्श संस्कारों और नैतिक मूल्यों के प्रसार में विद्याभारती ने निरन्तर महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1952 से ही देश में शिक्षा और संस्कृति के प्रसार में यह संगठन कार्य कर रहा है। उन्होंने प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को अपना मन परिवर्तन कर देश के बच्चों को प्रतिभाशाली बनाने के लिए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही समाज और राष्ट्र में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। झोपडी से महल तक की यात्रा शिक्षा से ही सम्भव है।
उन्होंने कहा कि देश में लॉर्ड थॉमस मैकाले ने देश में ऐसी शिक्षा के बीज डाले कि जैसे हम सदा गुलाम मानसिकता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति से अब उस गुलाम मानसिकता से मुक्ति की राह निकली है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों के मन में नैतिकता की शिक्षा का प्रसार किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नैतिकता के भाव मन में रहते तो पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होती। उन्होंने समृद्ध प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली की चर्चा करते हुए कहा कि तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय भारत की धरोहर थे। उन्होंने बप्पा रावल को याद करते हुए कहा कि वह महान योद्धा थे। देश में अरबों के आक्रमणों को रोकते हुए रावल पिंडी तक उन्होंने खदेड़ा। उन्हीं के नाम से रावल पिंडी स्थान हुआ।
राज्यपाल ने कहा कि डिग्री लेना ही पर्याप्त नहीं है, जरूरी यह भी है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी युवा प्रतिबद्ध होकर तैयारी करें। उन्होंने कहा कि बांसवाड़ा, उदयपुर, डुंगरपुर आदि में पचास प्रतिशत से अधिक जनजातीय लोग रहते हैं। उन्होंने आदिवासी, घुमंतू और गरीब लोगों की शिक्षा की नींव मजबूत किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसी से वे मुख्यधारा में आ सकेंगे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में चयनित अधिकारी सदा विनम्र रहें। इसी से वे उच्चतम शिखर पर भविष्य में पहुंच सकेंगे। उन्होंने कतार के अंतिम छोर पर स्थित व्यक्ति की आवाज सुनने को सदा प्राथमिकता देने, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ व्यवहार ही अच्छा नहीं रखने बल्कि जनता से जुड़े उनके कार्य करने करने का सदा प्रयास करने और विविधता को अंगीकार करते हुए गांव और शहर के लोगों की समस्याओं का समाधान प्रभावी रूप में किए जाने का आह्वान किया। उन्होंने अपने आस पास के वातावरण को समझते हुए, लोगों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तारीफ और खुशामद में अन्तर समझते हुए कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अच्छा करेंगे तो लोगों का यकीन प्रशासनिक सेवाओं के प्रति सदा बना रहेगा। उन्होंने नव चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए उनका अभिनंदन किया। इससे पहले चंद्रशेखर गौड़ ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। समारोह में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम, विद्याभारती के आखिल भारतीय मंत्री शिवप्रसाद और डॉ. जी. एल. शर्मा भी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *