गाजियाबाद में अत्याधुनिक जूता परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित, जूता उद्योग को मिलेगी मजबूती
नई दिल्ली{ गहरी खोज }: केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय परीक्षण गृह (उत्तरी क्षेत्र), गाजियाबाद ने अत्याधुनिक जूता परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की है। सरकार ने कहा कि यह सुविधा देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, निर्यातकों और निर्माताओं को विश्वसनीय, किफायती और उच्च-परिशुद्धता परीक्षण सेवाएं उपलब्ध कराएगी।
मंत्रालय के अनुसार यह प्रयोगशाला तेजी से बढ़ रहे भारतीय जूता उद्योग के लिए गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा और निर्यात क्षमता को भी बल मिलेगा। सरकार ने कहा कि उपभोक्ता अब ऐसे जूतों की अपेक्षा करते हैं जो टिकाऊ, सुरक्षित, आरामदायक और विभिन्न परिस्थितियों में लंबे समय तक उपयोग योग्य हों। ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए फिसलन प्रतिरोध, टिकाऊपन, सामग्री की मजबूती और हानिकारक रसायनों की अनुपस्थिति जैसे मानकों की कठोर जांच आवश्यक होती है।
राष्ट्रीय परीक्षण गृह, गाजियाबाद की इस उन्नत प्रयोगशाला में आधुनिक परीक्षण उपकरण और उन्नत अवसंरचना स्थापित की गई है। यहां भारतीय मानकों के अनुरूप विभिन्न प्रकार के जूतों की गुणवत्ता जांच की जा सकेगी। इनमें सुरक्षा और औद्योगिक जूते, विद्यालयी और चमड़े के जूते, पीवीसी जूते, सैंडल-चप्पल, बच्चों के जूते, खेल जूते तथा औद्योगिक और जोखिम वाले वातावरण में उपयोग होने वाले विशेष सुरक्षा जूते शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि प्रयोगशाला में सुरक्षा, टिकाऊपन, आराम और प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण परीक्षण किए जाएंगे। यह सुविधा अपेक्षाकृत कम शुल्क पर सटीक और समयबद्ध परीक्षण सेवाएं प्रदान करेगी, जिससे विशेष रूप से सूक्ष्म और लघु उद्योगों को लाभ मिलेगा।
गाजियाबाद में स्थापित यह प्रयोगशाला दिल्ली-एनसीआर, कानपुर और आगरा जैसे प्रमुख जूता विनिर्माण केंद्रों के निकट स्थित है। इससे नमूनों की जांच में समय कम लगेगा, परिवहन लागत घटेगी और उद्योगों को आसान पहुंच मिलेगी। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रयोगशाला भारतीय जूता उद्योग को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में सहायता करेगी। इससे उत्पादों की विश्वसनीयता, उपभोक्ता सुरक्षा, निर्यात प्रतिस्पर्धा और वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ेगी। सरकार के अनुसार यह पहल ‘विकसित भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप है। इससे देश में गुणवत्ता आश्वासन व्यवस्था मजबूत होगी और भारत को गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
