प्रतिस्पर्धा, अनिश्चित भविष्य और सोशल मीडिया के लगातार दबाव के बीच युवाओं में तनाव और चिंता के मामले बढ़े हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि इनमें से ज़्यादातर स्थितियां समय रहते पहचानी जाएं तो आसानी से संभाली जा सकती हैं।
चेतावनी के संकेत
- लगातार नींद न आना या बहुत ज़्यादा सोना
- पसंदीदा कामों में रुचि ख़त्म होना
- चिड़चिड़ापन, ध्यान न लगना, थकान
- दोस्तों और परिवार से दूरी बनाना
क्या मदद करता है
नियमित नींद का समय, सोने से एक घंटा पहले स्क्रीन बंद करना, रोज़ाना शारीरिक गतिविधि और किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करना — ये सरल क़दम बड़ा फ़र्क़ डालते हैं। ज़रूरत पड़ने पर पेशेवर परामर्श लेने में झिझक नहीं होनी चाहिए।
विशेषज्ञ ज़ोर देकर कहते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही अहम है और मदद मांगना कमज़ोरी नहीं, समझदारी है।
अगर आप या आपका कोई परिचित संकट में है, तो सरकारी टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।