डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये पर दबाव बना हुआ है। हाल के कारोबारी सत्रों में रुपया कमज़ोर होकर नए निचले स्तरों तक पहुंचा, जिसके बाद भारतीय रिज़र्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाज़ार में हस्तक्षेप किया।
कमज़ोरी की वजहें
- वैश्विक स्तर पर डॉलर की मज़बूती
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से आयात बिल पर असर
- विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली
- भू-राजनीतिक तनाव से जोखिम से बचने की प्रवृत्ति
आम आदमी पर असर
रुपया कमज़ोर होने से विदेश में पढ़ाई, विदेश यात्रा और आयातित वस्तुएं महंगी पड़ती हैं। दूसरी ओर आईटी और फार्मा जैसे निर्यात-केंद्रित क्षेत्रों को इसका कुछ लाभ मिल सकता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत स्थिति में होने के कारण केंद्रीय बैंक के पास उतार-चढ़ाव को संभालने की पर्याप्त गुंजाइश है।
