मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है। भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कीमतों में तेज़ी का सीधा असर आयात बिल पर पड़ता है।
असर कहां-कहां
- चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका
- परिवहन और मालभाड़ा लागत में वृद्धि
- पेंट, प्लास्टिक और रसायन उद्योग की लागत प्रभावित
- महंगाई के आंकड़ों पर देर से दिखने वाला असर
क्या हैं बचाव के उपाय
विशेषज्ञों के मुताबिक आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण, रणनीतिक भंडार और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना — ये तीनों दीर्घकालिक उपाय हैं जो झटकों से बचाव कर सकते हैं।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है और आपूर्ति में किसी तरह की कमी नहीं है।