स्मार्टफोन कंपनियों के बीच अब सबसे बड़ी होड़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फ़ीचर्स की है। कैमरा प्रोसेसिंग, बैटरी प्रबंधन, अनुवाद और टेक्स्ट सारांश जैसे कामों में AI का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ा है।
कहां दिख रहा असर
- कैमरा: कम रोशनी में बेहतर तस्वीरें और ऑब्जेक्ट हटाने जैसे एडिटिंग टूल
- बैटरी: इस्तेमाल के पैटर्न के आधार पर पावर प्रबंधन
- भाषा: रियल-टाइम अनुवाद और वॉयस टाइपिंग में सुधार
- सुरक्षा: स्पैम कॉल और फ़िशिंग लिंक की पहचान
ऑन-डिवाइस बनाम क्लाउड
कंपनियां अब ज़्यादा से ज़्यादा प्रोसेसिंग डिवाइस पर ही करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे इंटरनेट के बिना भी फ़ीचर काम करें और डेटा बाहर न जाए। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि उपयोगकर्ताओं को सेटिंग्स में जाकर यह ज़रूर देखना चाहिए कि कौन-सा डेटा साझा हो रहा है।
भारत जैसे बड़े बाज़ार में भाषाई AI फ़ीचर्स — ख़ासकर हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का समर्थन — आगे प्रतिस्पर्धा का बड़ा मैदान बनने जा रहा है।