गुजरात के बरडा जंगल में शेरों का नया ठिकाना तैयार, 17 शेरों की मौजूदगी और वैज्ञानिक अध्ययन ने बढ़ाई संरक्षण की उम्मीदें।
गांधीनगर: गुजरात के गिर जंगल से निकलकर एशियाई शेर अब अपने नए ठिकाने बरडा के जंगल में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। करीब 144 वर्षों के अंतराल के बाद शेरों ने प्राकृतिक रूप से बरडा क्षेत्र में फिर से अपना बसेरा बनाया है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के मुताबिक, बरडा वन्यजीव अभयारण्य भविष्य में एशियाई शेरों के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में फैला 192.31 वर्ग किलोमीटर का बरडा वन्यजीव अभयारण्य फिलहाल 17 शेरों का घर है। यहाँ की पहाड़ियाँ, घास के मैदान, पर्याप्त शिकार और अनुकूल वातावरण शेरों के लिए बेहतर परिस्थितियाँ उपलब्ध करा रहे हैं।
GPS ट्रैकिंग से सामने आई शेरों की नई कहानी
PLOS One में प्रकाशित ‘Beyond Gir: Barda Wildlife Sanctuary as a Potential Stronghold for Asiatic Lions’ नामक अध्ययन में जनवरी 2023 से जुलाई 2025 तक छह शेरों की गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। इनमें एक नर और पाँच मादा शेर शामिल थे, जिन्हें रेडियो कॉलर लगाए गए थे। इनसे 1.69 लाख से अधिक GPS लोकेशन प्राप्त हुईं।
अध्ययन में सामने आया कि शेर बरडा के घास के मैदानों का सक्रिय रूप से उपयोग कर रहे हैं। वे अपनी होम रेंज स्थापित करने के साथ सामाजिक संबंध भी विकसित कर रहे हैं। ये संकेत बरडा में शेरों की स्थायी आबादी विकसित होने की संभावनाओं को मजबूत करते हैं।
शेरों की सुरक्षा के लिए सरकार की तैयारी
राज्य सरकार बरडा में शेरों के संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए निगरानी, सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष से निपटने की व्यवस्था पर काम कर रही है। शेरों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए आठ पूर्णकालिक शेर ट्रैकर तैनात किए गए हैं।
इसके साथ ही, शेरों के लिए पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2025–26 में गिर वन्यजीव अभयारण्य से 441 चीतल बरडा के जंगल में छोड़े गए। वर्ष 2007 से अब तक भी यहाँ चीतल छोड़े जाते रहे हैं, जबकि सांभर की आबादी बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
इको-टूरिज्म से स्थानीय लोगों को मिलेगा फायदा
बरडा जंगल अब वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों के लिए भी महत्वपूर्ण बन रहा है। वर्ष 2024 में शुरू हुई इको-टूरिज्म पहल के तहत स्थानीय लोगों को नेचर गाइड और सफारी ऑपरेटर के रूप में अवसर मिले हैं।
अभयारण्य में पर्यटकों की संख्या पहले वर्ष के 2,271 से बढ़कर 2025–26 में 3,359 हो गई। यह लगभग 48 प्रतिशत की वृद्धि है।
बरडा में शेरों की बढ़ती मौजूदगी गुजरात के वन्यजीव संरक्षण के लिए एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है। यदि पर्याप्त आवास, शिकार और सुरक्षा सुनिश्चित रहती है, तो गिर के बाद बरडा भी एशियाई शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
