डेडलाइन खत्म, काम अधूरा: ₹2,450 करोड़ के CSMT प्रोजेक्ट में 28 महीने बाद सिर्फ 14.5% प्रगति
मुंबई के ₹2,450 करोड़ के CSMT पुनर्विकास प्रोजेक्ट का ठेका Ahluwalia Contracts (India) Limited (ACIL) को दिया गया है। 7 जनवरी 2026 की तय डेडलाइन गुजरने के बावजूद 28 महीने में सिर्फ 14.5% काम पूरा होने से प्रोजेक्ट की निगरानी और कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मुंबई। मुंबई के ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के ₹2,450 करोड़ के पुनर्विकास प्रोजेक्ट को 7 जनवरी 2026 तक पूरा किया जाना था, लेकिन तय समयसीमा बीतने के बावजूद परियोजना में देरी का दौर जारी है। प्रोजेक्ट का काम रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA) की निगरानी में चल रहा है और इसका EPC Contract M/s Ahluwalia Contracts (India) Ltd. को दिया गया है। RLDA की सितंबर 2025 की मासिक प्रगति रिपोर्ट में उस समय परियोजना की Physical Progress महज 14.5% दर्ज की गई थी। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि निर्धारित समयसीमा के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा क्यों नहीं हो सका और देरी के लिए जिम्मेदारी किसकी है।CSMT का बड़े पैमाने पर पुनर्विकास
CSMT Redevelopment Project के तहत स्टेशन परिसर और उससे जुड़े कई भवनों में निर्माण और पुनर्विकास का काम किया जाना है। इनमें DRM Complex, Platform No. 12 एवं 13, ORH Building, LD Node, Parcel-Linen-C&W Building और Main Line Building शामिल हैं। इन हिस्सों में excavation, piling, foundation, structural steel, RCC और refurbishment जैसे कई महत्वपूर्ण काम किए जाने हैं। यानी यह केवल स्टेशन की मरम्मत या सौंदर्यीकरण का काम नहीं, बल्कि बड़े स्तर का निर्माण और संरचनात्मक विकास प्रोजेक्ट है।
₹2,450 करोड़ का ठेका, 30 महीने की समयसीमा
दस्तावेजों के अनुसार, प्रोजेक्ट का Contract Agreement 1 जून 2023 को हुआ था। काम पूरा करने के लिए 30 महीने की समयसीमा तय की गई थी और इसकी निर्धारित completion date 7 जनवरी 2026 थी। लेकिन सितंबर 2025 की RLDA रिपोर्ट के अनुसार, उस समय तक करीब 28 महीने बीत चुके थे।
28 महीने में सिर्फ 14.5% काम
सितंबर 2025 तक प्रोजेक्ट की Physical Progress केवल 14.5% दर्ज की गई थी। यानी करीब 85.5% काम बाकी था। वहीं, प्रोजेक्ट की Overall Financial Progress 23.17% थी और रिपोर्ट में अब तक का expenditure ₹567.75 करोड़ दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि जब 30 महीने की निर्धारित समयसीमा लगभग समाप्त होने वाली थी, तब भी जमीन पर होने वाला अधिकांश काम बाकी था।
85.5% काम बाकी, समय सिर्फ करीब दो महीने
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब 28 महीने में केवल 14.5% फिजिकल प्रोग्रेस हुई, तो बाकी 85.5% काम को निर्धारित समयसीमा के अंतिम करीब दो महीनों में कैसे पूरा किया जाना था?
कई महत्वपूर्ण काम भी पीछे
RLDA की रिपोर्ट में अलग-अलग कार्यों की प्रगति भी दर्ज की गई है।
LD Node में:
- Basement Excavation – 61%
- Rock Anchoring – 41%
- PCC for Raft – 19%
- RCC Raft – 7%
- Waterproofing Membrane – 5%
वहीं Parcel, Linen और C&W Building में:
- Pile Work – 58%
- Pile Cap Excavation – 39%
- PCC for Pile Cap – 37%
- Pile Cap Casting – 26%
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य उस समय काफी पीछे चल रहे थे।
सवाल सिर्फ ठेकेदार पर नहीं, निगरानी पर भी
₹2,450 करोड़ के इतने बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में निर्माण की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है, लेकिन समय पर काम की निगरानी और निर्धारित समयसीमा के अनुसार प्रगति सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की भी जिम्मेदारी है। सितंबर 2025 में जब फिजिकल प्रोग्रेस सिर्फ 14.5% थी और completion date 7 जनवरी 2026 निर्धारित थी, तब सवाल उठता है कि RLDA ने काम की धीमी रफ्तार को लेकर क्या कार्रवाई की? क्या ठेकेदार को काम तेज करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए? क्या penalty या recovery का प्रावधान लागू किया गया? क्या प्रोजेक्ट की समयसीमा में बदलाव किया गया?
उपलब्ध RTI दस्तावेज इन सवालों का पूरा जवाब नहीं देते।
देरी का असर जनता पर पड़ सकता है
CSMT मुंबई का बेहद महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। लंबे समय तक redevelopment का काम चलने से यात्रियों की आवाजाही, स्टेशन परिसर की सुविधाओं और निर्माण क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में देरी होने पर निर्माण प्रबंधन और अन्य संबद्ध खर्च बढ़ सकते हैं। यदि देरी के कारण contract cost बढ़ती है या अतिरिक्त भुगतान अथवा variation होता है, तो इसका असर सरकारी खजाने पर पड़ सकता है। हालांकि उपलब्ध RTI दस्तावेजों में देरी से सरकार को हुई किसी निश्चित आर्थिक हानि का आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित वित्तीय प्रभाव के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
टेंडर में चार कंपनियों ने लगाई थी बोली
RTI के जवाब के अनुसार, CSMT Redevelopment Project के लिए चार कंपनियों ने बोली लगाई थी:
Ahluwalia Contracts (India) Ltd., Larsen & Toubro Ltd., NCC Ltd. और Afcons Infrastructure Ltd. RLDA के अनुसार, किसी भी bidder को technical parameters के आधार पर disqualify नहीं किया गया था और चारों bidders की financial bids खोली गई थीं।
अब जवाबदेही का सवाल
₹2,450 करोड़ का प्रोजेक्ट, 30 महीने की समयसीमा और समयसीमा खत्म होने से करीब दो महीने पहले सिर्फ 14.5% physical progress।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या ठेकेदार के काम की पर्याप्त निगरानी हुई?क्या RLDA ने समय रहते काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए प्रभावी कदम उठाए? क्या देरी के लिए कोई penalty या अन्य कार्रवाई की गई? और सबसे बड़ा सवाल—जब 28 महीने में सिर्फ 14.5% काम हुआ, तो बाकी 85.5% काम निर्धारित समयसीमा में कैसे पूरा होना था?
नोट: खबर में दिए गए सभी आंकड़े 27 अक्टूबर 2025 तक की RTI से प्राप्त स्थिति रिपोर्ट पर आधारित हैं। इसके बाद प्रोजेक्ट की प्रगति में बदलाव संभव है।
