सीधी अंगुली से घी नहीं निकलता है तो टेड़ी करनी पड़ती है
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: राजनीति में सफल वही माना जाता है जो तय कर ले यह काम करना है और किसी भी तरीके से करना है और करने में सफल होता भी है।देश हित में कोई काम सहयोग मांगने से होता है तो समझदार नेता सहयोग मांगता है और मांगने पर जब सहयोग नहीं मिलता है तो उसे पता है कि देशहित के लिए काम के लिए दूसरे तरीके से कैसे सहयोग जुटाया जा सकता है। संसद के पिछले सत्र में पीएम मोदी महिला आरक्षण व डिलिमिटेशन विधेयक को पास कराने के लिए कांग्रेस सहित सभी दलों से सहयोग की अपील की थी,यह कहने पर कि इसका श्रेय तो सरकार को मिलेगा,पीएम मोदी ने कहा था कि वह इसका श्रेय विपक्ष के नेताओं को देने को तैयार है,फिर भी विपक्ष ने विधेयक के विरोध में मत दिया और महिला आरक्षण व डिलिमिटेशन विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका।तब राहुल गांधी सहित विपक्ष के नेता बहुत खुश हुए थे कि संसद के भीतर उन्होंने मोदी को हरा दिया। पीएम मोदी ने अगर महिलाओं से वादा किया है कि उनको संसद में आरक्षण दिया जाएगा तो वह इसे पूरा करके दिखाएंगे भी। क्योंकि मोदी जो वादा करते हैं,उसे पूरा भी करते हैं। भले ही उसमें कुछ वक्त लग जाए।
संसद के पिछल सत्र में पीएम मोदी आरक्षण व डिलिमिटेशन विधेयक को संख्या बल नहीं होने के कारण पास नहीं करवा पाए थे और देश की महिलाओं को बता दिया था कि सरकार तो चाहती है कि महिलाओं को संसद में आरक्षण मिले, संसद में सीटों की संख्या बढ़े ताकि महिलाओं को आरक्षण भी मिल सके और पुरुष सांसदों की सीटें भी कम न हों।मोेदी सरकार को महिला आरक्षण व डिलिमिटेशन विधेयक पारित कराने के लिए संख्या बल बढ़ाना होगा। सहयोग से यह संख्या बल बढ़ा नहीं तो अब मोदी सरकार कूटनीति से यह संख्या बल बढ़ाने का प्रयास कर रही है। संसद में सीधी अंगुली से घी नहीं निकला तो अब अंगुली टेड़ी कर घी निकाला जा रहा है। यह काम मोदी सरकार करना नहीं चाहती थी लेकिन विपक्ष ने स्थिति ही ऐसी बना दी है कि अंगुली टेड़ी करनी पड़ रही है क्योंकि कई डिब्बों से घी निकाला जरूरी हो गया है।अहंकारी नेताओं को बताना जरूरी हो गया था कि तुम्हारी औकात नहीं है कि जब हम अंगुली टेड़ी करेंगे तो तुम घी निकालने से रोक सको।
सबसे पहले मोदी सरकार ने पं.बंगाल में ममता दीदी का घमंड तोड़ा।वह खुद को मोदी को हराने वाला बताकर खुश होती है और बताती थी कि ऐसा कोई नहीं देश में जो मोदी को उनके समान हरा सके।वह मोदी को हराती रही तो कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन इसबार पीएम मोदी ने ममता को हराया तो बहुत फर्क पड़ गया है। ममता खुद चुनाव हारी है, उनकी पार्टी चुनाव हारी और उनके जितने विधायक चुने गए उसमें से आधे से ज्यादा उससे अलग हो गए है, जितने सांसद थे उनमें से भी ज्यादातर ममता से अलग हो गए हैं।यानी विपक्ष जिस संख्या बल का घमंड कर रहा था, वह संख्या बल अब मोदी सरकार ने कम करना शुरू कर दिया है।पं. बंगाल की शेरनी ममता को भाजपा ने हराकर बिल्ली बना दिया है। वह अब कुछ करना चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती। उसके बीस सांसदों ने संसद में भाजपा का समर्थन करने का फैसला किया है। इससे भाजपा के पास बीस सासंद बढ़ गए हैं। सात राज्यसभा सांसद आप से अलग होकर भाजपा के पक्ष में पहले आ गए है।इससे राज्यसभा में भाजपा का संख्या बल बढ़ा है।
अभी भाजपा को अपने बिल संसद में पास कराने के लिए और सासंदों की जरूरत है।जहां जहां से सासंद तोड़े जा सकते हैं, उनको तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।शिवसेना उध्दव गुट के पास ९ सांसद है,आपरेशन टाइगर चलाकर इनको शिंदे गुट में शामिल करने की योजना पर महीनों से काम चल रहा था,पहले से तोड़कर अपने पाले में लाने की जरूरत नहीं थी इसलिए ठीक संसद सत्र के पहले ९ में से ६ सांसदों को तोड़ लिया गया है। वह शिवसेना उध्दव गुट से अलग हो गए हैं और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग गुट का दर्जा देने को कहा है।भाजपा ने महाराष्ट्र में शिवसेना को दूसरी बार तोडा़ है क्योंकि उध्दव ठाकरे को भी बड़ा घमंड था कि वह महाराष्ट्र मे शाह व मोदी से बड़े नेता हैं।आज उनको एहसास हो रहा होगा कि बड़े नेता तो शाह व मोदी है क्योंकि वह जो चाहते हैं वह कर लेते हैं। शाह के बार में कहा जाता है कि वह अपना और पार्टी का अपमान नहीं भूलते है और धोखा देने वाले को ऐसी सजा देते हैं कि वह जिंदगी भर याद करता है कि उसने शाह को धोखा दिया था और उसकी उसे यह सजा मिली है।
डीेएमके कांग्रेस से नाराज है,डीएमके को भाजपा सरकार का सहयोग करने के लिए मनाने का प्रयास किया जाएगा। बाकी दलों से भी सहयोग जुटाने का प्रयास किया जाएगा।अभी वक्त है कई दलों के सासंद बाकी हैं,उनको अपने पाले में लाने का प्रयास जारी है।जो टूट सकते हैं, उनको तोड़ा जाएगा जो सहयोग देने को राजी हो जाते हैं, उनका सहयोग लिया जाएगा और पिछले संसद सत्र में जो काम पूरा नहीं हो सका था उसे इस सत्र मे पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।कांग्रेस इस बात को समझ रही है यही वजह है कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि यह पूरा घटनाक्रम लोकसभा में एनडीए के लिए दो तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। अब कांग्रेस आरोप लगाते रहे कि लोकतांत्रिक परंपरा व संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी की जा रही है। देखा जाए तो इसके लिए कांग्रेस भी तो दोषी है। महिला आरक्षण बिल पास कराने कांग्रेस व विपक्ष ने मोदी सरकार को सहयोग किया होता तो आज मोदी सरकार को वह सब नहीं करना पड़ता जो न चाहकर भी करना पड़ रहा है।अब विपक्ष संख्या बल बढ़ाने के लिए मोदी सरकार की कितनी भी आलोचना करे।मोदी सरकार पिछले संसद सत्र में जो काम नहीं कर पाई थी, उसे इस बार पूरा करने कटिबध्द है।
पीएम मोदी व शाह जब कोई लक्ष्य तय कर लेते हैं और यह तय कर लेते हैं कि उसे कब तक पूरा करना है तो इसके रास्ते में आने वाली बाधाओं की पूरी जानकारी उनके पास होती है। उन बाधाओं को पार करने अपने लक्ष्य तक कैसे पहुंचना है,उसका पूरा रोड मैप उनके पास होता है।पीएम मोदी से पहले तो सही रास्ते से सभी के सहयोग से महिला आरक्षण व डिलिमिलिटेशन का प्रयास किया। वह जानते थे कि विपक्ष सहयोग नहीं करेगा फिर भी उन्होंने सहयोग मांगा ताकि जब बिना विपक्ष के सहयोग से इस काम को पूरा किया जाए तो विपक्ष के पास कहने को कुछ न बचे और काम का पूरा श्रेय मोदी सरकार को मिले और उसका पूरा राजनीतिक लाभ २०२९ के लोकसभा चुनाव में मिले। राहुल गांधी कहते हैं कि जिम्मेदारी और ईमानदारी मोदी सरकार की सोच से परे हैं तो पीएम मोदी अगले चुनाव में राहुल गांधी को बताएंगे कि ईमानदारी व जिम्मेदारी के कारण वह चौथी बार पीएम बने हैं और राहुल गांधी न ईमानदार हैं और न ही जिम्मेदार है इसलिए जनता ने उनको चौथी बार नकार दिया है।
