इरविन खन्ना संपादकीय { गहरी खोज }: मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी बांध कुज हादसे ने एक बार फिर देशवासियों को झिंझोड़कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में नाव के टक्कर खाने और हुगली में नाव पलटने से लोगों की मौतों को याद करा दिया है। बरगी बांध कांड प्रशासनिक लापरवाही है जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई और 4 लापता है। हादसे में बचे लोगों के अनुसार जब आंधी शुरू हुई तो कूज में सवार लोगों ने कैप्टन को कूज को किनारे ले जाने के लिए कहा, लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। मौसम विभाग द्वारा मौसम को दिए गए अलर्ट की अनदेखी की गई। क्रूज में पर्यटकों की संख्या को लेकर विवाद है। सरकार द्वारा पर्यटकों के लिए चलाई जा रही कुज सुविधा प्रशासनिक लापरवाही के कारण लोगों की मौत का कारण बन गई। नेशनल इंस्टीट्यूट आफ वाटर स्पोटर्स क्रूज संचालन के सुरक्षा नियमों के तहत प्रत्येक यात्री के लिए एक लाइफ जैकेट जरूरी होती है। यात्रा शुरू होने से पहले ही उसको लाइफ जैकेट पहनाई जानी चाहिए। बच्चों के लिए अलग साइज की जैकेट होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं था। बोट या कूज संचालन करने वाले स्टाफ को अपातकालीन स्थिति संभालने में प्रशिक्षित होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नजर नहीं आया। यदि मौसम खराब (तेज हवा. बारिश, तूफान) हो तो कूज का संचालन तुरंत रोक देना चाहिए। खराब मौसम के बावजूद कुज का संचालन किया गया। यात्रा शुरू होने से पहले सभी यात्रियों को आवश्यक सावधानी बरतने के बारे में बताना जरूरी है। खासकर लाइफ जैकेट कैसे पहनें, आपात स्थिति में क्या करें, इसके बारे में विस्तार से बताया जाए। इसका पालन नहीं हुआ। सुरक्षा मानकों के मद्देनजर 15 पर्यटको पर एक लाइफ गार्ड नियुक्त होना चाहिए, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसके पालन में भी लापरवाही सामने आई। इस दौरान हादसे में मां के सीने से चिपके 4 वर्षीय बच्चे की जो तस्वीर सामने आई है, वह मां की ममता को दर्शाने के साथ-साथ प्रश्न कर रही है कि इस हादसे के लिए जिम्मेवार कौन है? हादसे में जान गंवाने वालों का कसूर क्या है? और हादसे के दोषियों को क्या गैर इरादतन हत्या के आरोप में सजा देने की हिम्मत करेगी सरकार? बरगी बांध हादसा घोर लापरवाही नहीं बल्कि एक आपराधिक लापरवाही का मामला है और दोषियों को किए अपराध की सजा भी उनके किये अपराध के अनुसार ही मिलनी चाहिए।