गिरनार रोप-वे : आस्था और आनंद का अनूठा संगम
गुजरात में विभिन्न पवित्र पर्वतों पर स्थित यात्राधामों तक पहुँचने के लिए पिछले वर्ष कुल 47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लिया ‘उड़न खटोला’ का आनंद
2.12 किलोमीटर लंबा गिरनार रोप-वे दुनिया के सबसे लंबे रोप-वे में से एक
राज्य में गिरनार, पावागढ़ और अंबाजी में श्रद्धालुओं के लिए ‘उड़न खटोला’ की सुविधा उपलब्ध
गांधीनगर, 21 अगस्त : देश-विदेश के पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए गुजरात सदैव आस्था, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमुख केंद्र रहा है। राज्य के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों—गिरनार, पावागढ़ और अंबाजी—तक पहुंचने के लिए उपलब्ध रोप-वे सेवा श्रद्धालुओं के बीच लगातार लोकप्रिय हो रही है।
वर्ष 2025-26 के दौरान इन तीनों रोप-वे सेवाओं का लाभ कुल 47.32 लाख से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने उठाया। इनमें पावागढ़ रोप-वे से 23.43 लाख से अधिक, अंबाजी रोप-वे से 15.58 लाख से अधिक तथा जूनागढ़ के गिरनार रोप-वे से 8.31 लाख से अधिक लोगों ने यात्रा की।
रोप-वे सेवा विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए सुविधाजनक साबित हो रही है। कठिन पर्वतीय चढ़ाई के स्थान पर अब श्रद्धालु कम समय में सुरक्षित और आरामदायक तरीके से अपने आराध्य स्थलों तक पहुंच रहे हैं। यात्रा के दौरान पर्वतों, हरियाली और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद भी इस अनुभव को और खास बनाता है।
जूनागढ़ स्थित 2.12 किलोमीटर लंबा गिरनार रोप-वे दुनिया के सबसे लंबे रोप-वे में से एक है। यह गिरनार पर्वत की तलहटी को ऊंचाई पर स्थित पवित्र अंबाजी माता मंदिर से जोड़ता है।
लगभग 9 मिनट की आकर्षक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को गिरनार पर्वत की भव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। रोप-वे की सुविधा से हजारों सीढ़ियां चढ़ने की कठिनाई से राहत मिलती है, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र स्थल तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं।
गिरनार पर्वत पर अंबाजी मंदिर के साथ-साथ गुरु दत्तात्रेय मंदिर, गोरखनाथ मंदिर और प्राचीन जैन मंदिर जैसे अनेक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल स्थित हैं। वर्षा ऋतु में यहां बादलों से घिरे पर्वत और हरियाली पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं
‘उड़न खटोला’ ब्रांड के तहत संचालित गिरनार, पावागढ़ और अंबाजी रोप-वे में यात्रियों की सुविधा के लिए वेटिंग हॉल, फूड कोर्ट, फर्स्ट एड, व्हीलचेयर, पेयजल, शौचालय, लॉकर और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
दिव्यांगजनों के लिए विशेष छूट की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा, दिसंबर से मार्च के दौरान विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण के लिए विशेष योजनाओं और रियायतों का लाभ दिया जाता है।
इन रोप-वे सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता से गुजरात में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिल रही है। साथ ही स्थानीय क्षेत्रों में होटल, परिवहन, भोजन और अन्य पर्यटन संबंधी गतिविधियों के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
इस प्रकार गुजरात के गिरनार, पावागढ़ और अंबाजी के ‘उड़न खटोले’ केवल यात्रा का साधन नहीं, बल्कि आस्था, आधुनिक सुविधा, पर्यटन और प्राकृतिक आनंद का एक अनूठा संगम बनकर उभरे हैं।
