गुजरात के पालीताणा अस्पताल में टंकी बनी नहीं, ₹50.43 लाख का बिल! स्वास्थ्य विभाग ने लिया बड़ा एक्शन

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धर्मनंदन कंस्ट्रक्शन को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई

2.55 लाख लीटर की भूमिगत पानी की टंकी मौके पर मौजूद नहीं मिली, फिर भी बिल मंजूरी के लिए मुख्यालय भेजा गया; 2 इंजीनियरों के खिलाफ पुलिस शिकायत और सेवामुक्ति की कार्रवाई के निर्देश

गांधीनगर, 19 अगस्त। गुजरात के भावनगर जिले के पालीताणा अस्पताल से सरकारी निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल के लिए 2.55 लाख लीटर क्षमता की भूमिगत पानी की टंकी का निर्माण किया जाना था, लेकिन स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के निरीक्षण के दौरान मौके पर टंकी का काम हुआ ही नहीं मिला।

इसके बावजूद इस काम के लिए ₹50.43 लाख का बिल तैयार कर उसे मंजूरी के लिए मुख्यालय में प्रस्तुत किए जाने का मामला सामने आया। मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मंत्री के दौरे में खुली मामले की पोल

पालीताणा अस्पताल के हालिया दौरे के दौरान स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया को अस्पताल के लिए स्वीकृत भूमिगत पानी की टंकी के काम की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिली। मौके पर निरीक्षण में पाया गया कि 2.55 लाख लीटर क्षमता वाली टंकी का निर्माण हुआ ही नहीं था।

मामला सामने आने के बाद मंत्री ने तत्काल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पालीताणा अस्पताल तथा प्रोजेक्ट इम्प्लिमेंटेशन यूनिट (PIU) के संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की और पूरे मामले की समीक्षा की।

बिल किस आधार पर तैयार हुआ?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया कि जब टंकी का निर्माण मौके पर हुआ ही नहीं था, तो उसके लिए ₹50.43 लाख का बिल किस आधार पर तैयार किया गया और उसे मुख्यालय में मंजूरी के लिए किस प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत किया गया?

स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने बिल प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका को गंभीरता से लिया है।

दो इंजीनियरों के खिलाफ पुलिस शिकायत के निर्देश

मामले में बिल प्रस्तुत करने वाले:

  • मेहुल दवे – इनचार्ज कार्यपालक इंजीनियर
  • एन.वी. कालिया – उप कार्यपालक इंजीनियर

के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही ड्यूटी में लापरवाही बरतने के मामले में दोनों अधिकारियों के खिलाफ सेवामुक्ति की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

धर्मनंदन कंस्ट्रक्शन को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई

मामले में संबंधित निर्माण एजेंसी धर्मनंदन कंस्ट्रक्शन, सूरत के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इससे स्पष्ट है कि सरकार ने मामले को केवल विभागीय लापरवाही तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ निर्माण एजेंसी की भूमिका पर भी कार्रवाई शुरू की है।

“जनता के पैसे में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं”

स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने स्पष्ट कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटित सार्वजनिक धन के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य परियोजनाओं में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मंत्री ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी विकास कार्यों में स्वीकृत काम मौके पर वास्तविक रूप से और निर्धारित मानकों के अनुसार पूरा होना चाहिए तथा जनता के धन का किसी भी तरह से गैर-जिम्मेदाराना इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

बड़ा सवाल

पालीताणा अस्पताल का यह मामला सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी और बिल पास करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब मौके पर 2.55 लाख लीटर की पानी की टंकी बनी ही नहीं थी, तो ₹50.43 लाख का बिल तैयार कर मुख्यालय तक कैसे पहुंचा?

अब पुलिस शिकायत, विभागीय कार्रवाई और निर्माण एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की

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