हिमाचल प्रदेश के चंबा में खाई में गिरी बोलेरो, सात लोगों की मौत

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शिमला{ गहरी खोज }: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में एक सड़क हादसे में एक ही गांव के सात लोगों की मौत हो गई। इनमें तीन सगे भाई व दम्पति शामिल है। मृतकों में चार पुरूष व तीन महिलाएं हैं। हादसा बुधवार देर रात चुराह विधानसभा क्षेत्र के पुखरी-मसरूंड मार्ग पर माणी जीरो के पास हुआ, जहां एक बोलेरो वाहन अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में चुन्नी लाल (65), देवी लाल (62), बबली देवी पत्नी मोती राम (45), मोती राम (50), अनीता कुमारी (20), कुंता देवी (53), मनोहर लाल (34) शामिल हैं। इसमें चुन्नी लाल, देवी लाल और मोती राम सगे भाई हैं।
यह हादसा उस समय हुआ जब पंचायत कुठेड़ के महल गांव के निवासी एक मुंडन संस्कार समारोह में शामिल होकर वापस अपने घर लौट रहे थे। परिवार और गांव के लोग काकड़ोथा गांव में आयोजित धाम में शामिल हुए थे और देर रात समारोह से लौटते समय यह दुर्घटना हो गई। हादसे के बाद पूरे महल गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। सात लोगों की एक साथ मौत से इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है।
पुलिस के अनुसार, हादसा रात करीब दो बजे के आसपास हुआ। बोलेरो अचानक चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई और सड़क से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। स्थानीय लोगों को घटना की जानकारी मिलने के बाद तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। अंधेरे और खड़ी ढलान के कारण बचाव अभियान काफी कठिन रहा। बाद में पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर सभी शवों को खाई से बाहर निकाला।
चंबा के पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि दुर्घटना में सात लोगों की मौत हुई है। इनमें अधिकतर एक ही परिवार के सदस्य थे। उन्होंने कहा कि सभी मृतक पंचायत कुठेड़ के महल गांव के रहने वाले थे।
पुलिस को हादसे की सूचना आज तड़के मिली। इसके बाद राहत कार्य शुरु किया गया। हादसे के बाद सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज चंबा भेज दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि वाहन अनियंत्रित होने के कारण यह हादसा हुआ, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्घटनास्थल पर सड़क किनारे पर्याप्त सुरक्षा अवरोधक (क्रैश बैरियर) नहीं थे औऱ यदि वहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था होती तो हादसे की गंभीरता कम हो सकती थी।
गौरतलब है कि चंबा जिला हाल के महीनों में कई बड़े सड़क हादसों का गवाह बना है। बीते 29 मई को बैरागढ़-साच पास-किलाड़ मार्ग पर एक इनोवा वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें छत्तीसगढ़ के आठ पर्यटकों की मौत हुई थी। इससे पहले 10 मई को भी चंबा में हुए एक सड़क हादसे में गुजरात के छह पर्यटकों की जान चली गई थी। हिमाचल प्रदेश में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में करीब एक हजार लोगों की मौत होती है।

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