विश्व योगासन चैंपियनशिप ने मॉरीशस के युवाओं को उनकी भारतीय जड़ों से जोड़ा

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अहमदाबाद{ गहरी खोज }: मॉरीशस के युवाओं के लिए भारत अब तक केवल परिवार की कहानियों, दादा-दादी की यादों और पीढ़ियों से चली आ रही बातचीत का हिस्सा था, लेकिन अहमदाबाद में आयोजित पहली विश्व योगासन चैंपियनशिप ने उनके लिए इस रिश्ते को पहली बार वास्तविक अनुभव में बदल दिया।
मॉरीशस से आये कई युवा खिलाड़ियों के लिए यह प्रतियोगिता सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भाग लेने का अवसर नहीं थी, बल्कि अपने पूर्वजों की धरती से जुड़ने की एक भावनात्मक यात्रा भी बन गई। प्रतियोगिता में भाग लेने वाली चेतना रिसॉल, परिणीति कलकाह और गणिशा बजाह ने बताया कि उनके परिवार की जड़ें बिहार से जुड़ी हैं। आर्या चेलुम्ब्रुन का परिवार तमिलनाडु से जुड़ा है, जबकि दक्षेश साई जूरुन का पारिवारिक संबंध बिहार और तमिलनाडु दोनों से रहा है।
मॉरीशस से आई इन खिलाड़ियों के लिए भारत की यात्रा का मतलब पहली बार उस देश तक पहुंचना था, जिसके बारे में उन्होंने अब तक केवल परिवार की कहानियों में सुना था। 19 वर्षीय चेतना रिसॉल ने साई मीडिया से बताया कि उन्हें यह तो पता था कि उनके पूर्वज बिहार से थे, लेकिन परिवार के मूल गांव या क्षेत्र की स्पष्ट जानकारी अब नहीं बची है। उन्होंने कहा कि भारत आने के बाद उनके भीतर अपनी जड़ों को समझने की नई जिज्ञासा पैदा हुई है।
उन्होंने कहा कि अब जब मैं भारत आ चुकी हूं, तो भविष्य में अपने परिवार की विरासत के बारे में और जानना चाहूंगी। मैं फिर से यहां आना चाहती हूं, बिहार जाना चाहती हूं और अपने परिवार के साथ अपनी जड़ों को समझना चाहती हूं। 13 वर्षीय गणिशा बजाह ने भी इसी तरह का अनुभव साझा किया। उनके अनुसार, बचपन में भारत उनके लिए केवल परिवार के इतिहास का हिस्सा था, लेकिन यहां आने के बाद वह जुड़ाव वास्तविक महसूस हुआ।
मॉरीशस दल के साथ आईं उप-प्रधानाचार्य रीना देवकरुन और प्रशिक्षक दिशा नेकितसिंग भी बिहार से जुड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि रखती हैं। उनके लिए भी यह यात्रा भावनात्मक महत्व रखती थी। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मॉरीशस में भारतीय मूल के कई परिवार जानते हैं कि उनके पूर्वज भारत से गए थे, लेकिन समय के साथ रिकॉर्ड और जानकारी खोती चली गई। ऐसे में योगासन जैसी प्रतियोगिताएं नई पीढ़ी को अपनी पहचान और इतिहास से दोबारा जुड़ने का अवसर दे रही हैं।
उनके अनुसार योग ने उन्हें अधिक अनुशासित, शांत और संतुलित बनाया है। विश्व योगासन चैंपियनशिप ने यह दिखाया कि खेल केवल पदक जीतने का मंच नहीं होता, बल्कि यह पीढ़ियों और संस्कृतियों को भी जोड़ सकता है। अब जब मॉरीशस का यह दल वापस लौटेगा तो वह केवल प्रतियोगिता का अनुभव नहीं, बल्कि अपनी भारतीय विरासत को लेकर नई समझ और जुड़ाव भी साथ लेकर जाएगा।

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