कनाडा भेजने के नाम पर 1.83 करोड़ की ठगी, आरोपित गिरफ्तार
नई दिल्ली{ गहरी खोज }: कनाडा में नौकरी और व्यापार निवेश के जरिए स्थायी निवास दिलाने का झांसा देकर करीब 1.83 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले कथित इमिग्रेशन कंसल्टेंट को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने गिरफ्तार किया है। आरोपित की पहचान पंजाब के डेराबस्सी निवासी धर्मिंदर शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके कब्जे से एक लैपटॉप भी बरामद किया है, जिसमें मामले से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मिलने की संभावना है।
क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गाैतम ने रविवार काे बताया कि , इस संबंध में वर्ष 2024 में क्राइम ब्रांच थाने में एफआईआर संख्या 176/2024 के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि कोरोना महामारी की पहली लहर के बाद शिकायतकर्ता महिला कनाडा में रोजगार के बेहतर अवसरों की तलाश में वहां बसना चाहती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात धर्मिंदर शर्मा से हुई, जिसने खुद को एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी फर्म का डायरेक्टर (ऑपरेशंस) बताया।
आरोप है कि धर्मिंदर ने खुद को कनाडाई इमिग्रेशन और विदेशी निवेश कार्यक्रमों का विशेषज्ञ बताकर महिला को कनाडा में काराेबार में निवेश योजना के तहत 2.50 लाख कनाडाई डॉलर निवेश करने के लिए राजी किया। इसके अलावा 45 हजार कनाडाई डॉलर प्रोफेशनल फीस के नाम पर भी लिए गए। इस तरह आरोपी ने कुल 2.95 लाख कनाडाई डॉलर, यानी करीब 1.83 करोड़ रुपये ऐंठ लिए।
जांच में पता चला कि आरोपित ने महिला का भरोसा जीतने के लिए ऐसे दस्तावेज तैयार किए, जिनमें उसे कनाडा की एक हॉस्पिटैलिटी कंपनी में डायरेक्टर और शेयरहोल्डर दिखाया गया था। हालांकि बाद में जांच में खुलासा हुआ कि महिला को कभी कंपनी में हिस्सेदारी दी ही नहीं गई और कंपनी का स्वामित्व अन्य लोगों के पास ही रहा।
पुलिस के मुताबिक, आरोपित ने विदेशी खातों में रकम प्राप्त करने के बाद उसे वैध कारोबारी गतिविधियों में लगाने के बजाय नकद निकासी, डेबिट ट्रांजैक्शन और कई खातों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर कर दिया। वहीं कनाडाई अधिकारियों द्वारा वीजा आवेदन बार-बार खारिज किए जाने के बावजूद आरोपी महिला को लगातार झूठे आश्वासन देता रहा। वह कभी पुनर्विचार याचिका दाखिल करने तो कभी प्रक्रिया जारी होने का दावा कर रकम वापस करने से बचता रहा। क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया कि तीन बार वीजा आवेदन खारिज होने के बाद भी आरोपित महिला को गुमराह करता रहा। साथ ही कंपनी के इंकॉरपोरेशन दस्तावेजों में शिकायतकर्ता का नाम कहीं दर्ज नहीं मिला। मामले की जांच इंस्पेक्टर विनय कुमार की देखरेख में एएसआई संजय समेत अन्य पुलिसकर्मियों की टीम ने की। लगातार तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद आरोपित को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपित एमबीए ग्रेजुएट है और खुद को कनाडा आधारित इमिग्रेशन तथा विदेशी निवेश योजनाओं का विशेषज्ञ बताकर लोगों को प्रभावित करता था। बरामद लैपटॉप से ईमेल, वित्तीय लेनदेन, इमिग्रेशन दस्तावेज, सोशल मीडिया चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।
