राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान को बनाएंगे ‘ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर’ : डॉ. जितेंद्र सिंह

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को विश्वास व्यक्त किया कि देश के राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों का योगदान भारत को “ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर” बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि ‘विज्ञान-टेक’ कार्यक्रम भविष्य में सहयोग आधारित अनुसंधान और नवाचार का एक आदर्श मॉडल बनेगा। यह कार्यक्रम इस बात का उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि सार्वजनिक अनुसंधान किस प्रकार वास्तविक दुनिया में व्यापक और सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की वैश्विक तकनीकी साख लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से नए आयाम स्थापित कर रहा है। जेनेटिक कोड की डिकोडिंग से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान तक भारत की उपलब्धियां विश्व स्तर पर पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आम लोगों के जीवन को भी सीधे प्रभावित कर रही है। गहरे समुद्र में रोबोटिक्स तकनीक, सुनामी चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन तंत्र जैसे नवाचार देश को अधिक सुरक्षित और आपदा-सक्षम बना रहे हैं। इसके अलावा जैव-फोर्टिफाइड फसलों, स्वच्छ ऊर्जा और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित ‘विज्ञान-टेक’ कार्यक्रम इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र है। इस कार्यक्रम में 14 मंत्रालय और विभाग एक ही मंच पर अपने अनुसंधान संस्थानों के साथ स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में लैब-टू-मार्केट सफलता की कहानियों और मजबूत नवाचार इकोसिस्टम को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि 11 मई भारत के इतिहास का एक गौरवशाली दिन है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में वर्ष 1998 में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण ने भारत को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। रिजिजू ने देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और नवप्रवर्तकों को नमन करते हुए कहा कि उनका समर्पण भारत को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

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