महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन से सत्ता पर एकाधिकार जमाने की साजिश विपक्षी एकजुटता ने विफल की: शोभा ओझा

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Shoba oza

भोपाल{ गहरी खोज }: महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में सत्ता पर एकाधिकार की साजिश रची थी जो विफल हो गई है। दरअसल लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित नहीं हो पाया, जिसको लेकर भाजपा कांग्रेस पर हमले बोल रही है, वहीं कांग्रेस की ओर से भी जवाब दिया जा रहा है।
महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शोभा ओझा ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए भोपाल में कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन के माध्यम से सत्ता पर एकाधिकार जमाने की जो साजिश रची थी, विपक्षी एकजुटता ने उसे विफल कर दिया है, लिहाजा कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए संसद में मिली इस जीत का स्वागत करती है।
शोभा ओझा ने आगे कहा कि महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक पर हुए मतदान ने स्पष्ट कर दिया है कि देश अब विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। कुल 528 मतों में से विधेयक के पक्ष में केवल 298 मत पड़े, जबकि विरोध में 230 मत पड़े, जिसके फलस्वरूप यह असंवैधानिक संशोधन पारित नहीं हो पाया।
उन्होंने विपक्ष की एकजुटता का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के साथ ही समूचा विपक्ष महिला आरक्षण के पक्ष में 100 प्रतिशत एकजुट है। सितंबर 2023 में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का समर्थन किया था और आज भी हमारी मांग स्पष्ट है कि महिलाओं को उनका हक तुरंत मिलना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण के प्रति कांग्रेस का यह रुख कोई नया नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण कांग्रेस की विचारधारा का मूल हिस्सा रहा है। वर्ष 1989 में ही तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने पंचायतों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का प्रस्ताव रखा। इसके बाद 1992-93 में नरसिम्हा राव सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के जरिए पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया। इसके बाद वर्ष 2010 में यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराया। देश भर में जो लाखों निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्थानीय शासन का हिस्सा हैं, यह कांग्रेस की नीतियों का ही परिणाम है।

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