श्रद्धालुओं की मौत
- इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }: पंजाब के मोगा, श्री मुक्तसर साहिब और लुधियाना से दो बसों में 132 श्रद्धालु वृंदावन गये थे। उनमें से कुछ श्रद्धालु यमुना में नौकाविहार करने के लिए गए, उनकी नौका केशीघाट पर पैंटून पुल (पीपापुल) से टकरा गई। परिणामस्वरूप नौका उलट गई और उसमें सवार 37 श्रद्धालु डूबने लगे, उसमें से 22 को बचा लिया गया। 10 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, चालक समेत अन्य को ढूंढने का प्रयास जारी है। मामले में भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की लापरवाही सामने आई है। यहां रिवर फ्रंट के निर्माण के लिए पैंटून पुल के पीपों को दोपहर में कसा जा रहा था, लेकिन नौकाओं की आवाजाही नहीं रोकी गई थी। पैंटून पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने कराया था। वर्तमान में केशीघाट पर रिवर फ्रंट का काम भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण करा रहा है। ऐसे में पुल को खोलने और उसे जोड़ने की जिम्मेदारी प्राधिकरण की है। लेकिन सुरक्षा के इंतजाम प्राधिकरण की ओर से नहीं किए गए। प्राधिकरण के प्रोजेक्ट मैनेजर पीयूष यादव ने बताया कि उनकी ओर से कोई गलती नहीं की गई। मोटरबोट में सवारियां अधिक थीं और वह खुद पैंटून पुल से टकरा गई। डीआइजी शैलेष पांडेय अनुसार 10 लोगों की मृत्यु हुई है। 22 श्रद्धालुओं को सकुशल निकाल लिया गया है, जिनमें से आठ को चोटें आई हैं। चालक समेत पांच लापता लोगों की तलाश की जा रही है। सेना के स्ट्राइक वन फोर्स के गोताखोर व एसडीआरएफ की टीमें भी राहत कार्य में जुटी हैं।
इस दुःखद घटना के लिए कौन जिम्मेवार था, उसका जांच के बाद ही पता चलेगा। लेकिन जिन्दगी की अनिश्चिता एक बार फिर सामने आ गई है। भगवान में आस्था रखने वाले इन श्रद्धालुओं को क्या पता था कि उनके साथ अगले पल क्या होने वाला है। इनमें से तो कुछ ने अपनी वीडियो बनाकर अपने घर इस संदेश के साथ भेजी थी सब ठीक है लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। नौकाविहार करने वालों में से कुछ की यह यात्रा अंतिम यात्रा में बदल गई।
यहां जलमार्ग प्राधिकरण की लापरवाही के साथ-साथ नौका में सवारियों की संख्या भी दुर्घटना का कारण हो सकती है। अमूमन नाव चालक संख्या से अधिक लोग बिठा लेते हैं, टक्कर होने के कारण नाव डांवाडोल हुई और पलट गई। शायद हादसा टल सकता था, अगर नियमित संख्या अनुसार सवार होते। सरकार व स्थानीय प्रशासन को श्रद्धालुओं की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करानी चाहिए और यह बात सुनिश्चित की जानी चाहिए कि भविष्य में ऐसे हादसे न हों। पीड़ित परिवारों से सहानुभूति है। परमात्मा से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने चरणों में स्थान दें।
