तीन राज्यों में रिकॉर्डतोड़ मतदान
- इरविन खन्ना
संपादकीय { गहरी खोज }: असम, केरल और पुडुचेरी में हुए रिकॉर्डतोड़ मतदान ने भारतीयों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में मजबूत होती आस्था को ही जगजाहिर किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भारी मतदान पर कहा कि असम, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे लोकतांत्रिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक प्रमाण हैं। निर्वाचन आयोग की ओर से मैं प्रत्येक मतदाता को बधाई देता हूं।
गौरतलब है कि दोनों राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) में पिछले 50 वर्षों में सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार असम में 85.6 प्रतिशत, केरल में 78.23 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.8 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। उल्लेखनीय है कि 2021 के विधानसभा चुनावों में असम में 82.04 प्रतिशत, केरल में 74.06 प्रतिशत और पुडुचेरी में 82.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने कहा कि यह रिकॉर्ड मतदान दर्शाता है कि मतदाताओं का चुनाव निकाय और मतदाता सूचियों के पारदर्शी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर गहरा भरोसा है। जिन प्रमुख नेताओं की चुनावी किस्मत ईवीएम में कैद हो गई, उनमें असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, राज्य भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी शामिल हैं। विधानसभा चुनावों के अलावा, कर्नाटक के बागलकोट और दावणगेरे, नागालैंड के कोरिडांग और त्रिपुरा के धर्मनगर में भी उपचुनाव हुए।
विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे मतदान पुननिरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के साथ-साथ केंद्र सरकार की नियत व नीति पर शंका जताकर उनको कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी। विपक्षी दलों द्वारा मतदाताओं में भी भ्रम व भ्रांतियां फैलाने का प्रयास किया गया। मामला देश के सर्वोच्च न्यायालय तक गया और उसके आदेश के बाद ही प. बंगाल में गहन पुनः निरीक्षण का कार्य हुआ।
तीन राज्यों में हुए शांतिपूर्ण मतदान राष्ट्र के लिए एक राहत भरा समाचार है, क्योंकि देशविरोधी ताकतें भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयास करती रही और कर भी रही हैं। देशविरोधी ताकतों का लक्ष्य नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका की तरह असंतोष फैलाकर व्यवस्था को लड़खड़ाना ही था। भारत के परिपक्व मतदाता ने रिकॉर्डतोड़ मतदान कर देशविरोधी ताकतों के मुंह पर तमाचा मारा है। भारतीयों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास और आस्था को जगजाहिर किया है। सत्ता में कौन सा दल आता है उसका परिणाम आने पर ही पता चलेगा। सत्ता में कोई भी आये यह जीत तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की ही है।
