बुखार हो तो खुद से एंटीबायोटिक शुरू न करें -डॉ. हर्ष तोषनीवाल
CIDSCON-2026 डॉक्टरों की एक वैज्ञानिक कॉन्फ्रेंस है, जिसमें संक्रमण से जुड़ी बीमारियों और उनके आधुनिक इलाज पर चर्चा होती है।
गांधीनगर, 20 अगस्त: बुखार आते ही एंटीबायोटिक शुरू कर देना भविष्य में मरीजों के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। संक्रामक रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सामान्य वायरल या मौसमी बुखार में बिना सही निदान के एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित CIDSCON-2026 से पहले युवा डॉक्टरों के लिए आयोजित विशेष वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं के बढ़ते रेजिस्टेंस को लेकर चिंता जताई।
CIDSCON के सह-आयोजन अध्यक्ष डॉ. हर्ष तोषनीवाल ने कहा कि हर बुखार का इलाज एंटीबायोटिक नहीं है। मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर लैब टेस्ट के बाद ही सही उपचार तय किया जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि वायरल बुखार में अनावश्यक एंटीबायोटिक देने से भविष्य में इन महत्वपूर्ण दवाओं की प्रभावशीलता कम हो सकती है। यानी जिस दवा से आज बीमारी का इलाज हो रहा है, उसका गलत इस्तेमाल भविष्य में गंभीर संक्रमण के दौरान मरीज के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
अब दाद भी बन रहा चुनौती
वर्कशॉप में माइकोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. एम. आर. शिवप्रकाश ने फंगल इन्फेक्शन और एंटीफंगल रेजिस्टेंस को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दाद या रिंगवर्म, जो पहले सामान्य मरहम से ठीक हो जाता था, अब कई मामलों में जिद्दी संक्रमण का रूप ले रहा है।
यह संक्रमण शरीर के बड़े हिस्से और सिर तक फैल सकता है तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलने का खतरा भी रहता है। विशेषज्ञों ने कहा कि फंगल इन्फेक्शन में भी बिना सही पहचान के दवाओं का इस्तेमाल समस्या को और जटिल बना सकता है।
डॉक्टरों को दिया गया खास प्रशिक्षण
CIDSCON-2026 के पूर्वार्ध में आयोजित वर्कशॉप्स में युवा चिकित्सकों को संक्रामक रोगों की सही पहचान, एंटीबायोटिक के विवेकपूर्ण उपयोग, अस्पतालों में इंफेक्शन कंट्रोल और कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों के उपचार के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक की मदद से संक्रामक रोगों के निदान और उपचार के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है—बुखार हो तो खुद से एंटीबायोटिक शुरू न करें। पहले बीमारी की सही वजह जानना जरूरी है, क्योंकि गलत दवा का इस्तेमाल आज राहत दे या न दे, लेकिन भविष्य में गंभीर संक्रमण के इलाज को मुश्किल जरूर बना सकता है।
