नेपाल में विपक्षी सांसदों ने संवैधानिक निकायों में सरकारी हस्तक्षेप पर जताई आपत्ति

0
2181da565966962654e3d3af2758eac2

काठमांडू{ गहरी खोज }:नेपाल की संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में विपक्षी सदस्यों ने संवैधानिक निकायों में सरकार के हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताते हुए संवैधानिक पदाधिकारियों से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर स्पष्टीकरण की मांग की है। विपक्षी सांसदों ने कहा कि जब तक उनकी चिंताओं का समाधान नहीं होता और उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, उनका विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा।
प्रतिनिधि सभा की बैठक गुरुवार को शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने इस मुद्दे को उठाया और सीमा संबंधी मुद्दों पर प्रधानमंत्री के बयान को संसदीय अभिलेख से हटाने की मांग दोहराई। विपक्षी सदस्यों के विरोध के बाद प्रतिनिधि सभा के स्पीकर डीपी अर्याल ने सीपीएन (यूएमएल) के सदस्य नरेंद्र कुमार केरूंग को सदन में बोलने की अनुमति दी।
केरुंग ने उन खबरों पर सवाल उठाया जिनमें कहा गया था कि संवैधानिक पदाधिकारियों को प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय में बुलाया गया और उन्हें पूछताछ, हिरासत या गिरफ्तारी की धमकी दी गई। उन्होंने सरकार से इस विषय पर जवाब देने की मांग की और प्रधानमंत्री से सीमा विवाद के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
इसी तरह राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की सांसद लक्ष्मी पोखरेल ने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान और वित्त मंत्री द्वारा इस्तेमाल की गई कथित धमकीपूर्ण भाषा सरकार के लिए हितकर नहीं होगी। उन्होंने उन कार्रवाइयों पर भी आपत्ति जताई जिन्हें उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को डराने एवं उनका अपमान करने वाला बताया।
नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद रमेश मल्ल ने चेतावनी दी कि सरकार के हालिया कदम देश के लिए कठिनाइयां पैदा कर सकते हैं। उन्होंने संवैधानिक निकायों के प्रमुखों को पूछताछ के लिए बुलाने और उनके खिलाफ संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की खबरों को गंभीर मामला बताते हुए इसकी जांच की मांग की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *