जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार परियोजना पर राजनाथ सिंह को लिखा पत्र, वैकल्पिक रक्षा ढांचे पर विचार की मांग

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नई दिल्ली{ गहरी खोज }: कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने इसमें कहा कि इस परियोजना को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर उचित ठहराने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि इसके मौजूदा स्वरूप से बड़े स्तर पर पारिस्थितिक क्षति होने की आशंका है। पत्र में कहा गया कि उन्होंने इससे पहले 10 मई को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री को तथा 13 मई को केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री को भी पत्र लिखकर परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और वन अधिकार अधिनियम संबंधी मुद्दे उठाए थे।
उन्होंने कहा कि देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और भारत की सामरिक शक्ति को विश्वसनीय रूप से प्रदर्शित करने की आवश्यकता पर कोई मतभेद नहीं हो सकता, लेकिन इसके नाम पर ऐसी परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं है, जिससे व्यापक पर्यावरणीय नुकसान हो।
पत्र में जयराम रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप के कैंपबेल बे में स्थित आईएनएस बाज को जुलाई 2012 में कमीशन किया गया था, लेकिन मौजूदा रनवे की लंबाई को तीन गुना बढ़ाने और नौसैनिक जेट्टी बनाने की योजनाएं पिछले लगभग पांच वर्षों से मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं। इन योजनाओं का पर्यावरण पर प्रभाव भी मौजूदा ग्रेट निकोबार परियोजना की तुलना में काफी कम होगा।
उन्होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार कमांड की कई मौजूदा सैन्य परिसंपत्तियों का विस्तार भी अपेक्षाकृत कम पर्यावरणीय क्षति के साथ किया जा सकता है। इनमें आईएनएस कार्दीप, आईएनएस कोहासा, आईएनएस उत्क्रोश, आईएनएस जरावा और कार निकोबार वायुसेना स्टेशन शामिल हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना के तहत प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह और टाउनशिप देश की सैन्य क्षमता को किसी प्रकार नहीं बढ़ाते, लेकिन अब इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर उचित ठहराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार परियोजना अपने वर्तमान स्वरूप में पारिस्थितिक तबाही का नुस्खा है। उन्होंने रक्षा मंत्री से आग्रह किया कि वे उन वैकल्पिक प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करें, जिनका सुझाव कुछ प्रतिष्ठित नौसेना अधिकारियों ने भी अपने लेखों और विश्लेषणों में दिया है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना में ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, हवाई अड्डा, ऊर्जा संयंत्र और टाउनशिप सहित कई बड़े आधारभूत ढांचा विकास कार्य प्रस्तावित हैं। परियोजना को लेकर पर्यावरणविदों, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों की ओर से लगातार आपत्तियां जताई जा रही हैं।

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