सामाजिक सद्भाव से ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण : डॉ. मोहन भागवत

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मैसूर{ गहरी खोज }: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मत है कि समाज में सद्भाव, परस्पर विश्वास और सेवा की भावना विकसित होने पर ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है। कर्नाटक के मैसूर में जेएसएस महाविद्यापीठ द्वारा सुत्तूर मठ परिसर में आयोजित सुवर्ण महोत्सव विशेष व्याख्यानमाला में गुरुवार को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “सामाजिक सद्भाव राष्ट्र की प्रगति का प्रमुख आधार है। समाज विभाजित होने पर राष्ट्र कमजोर हो जाता है और समाज एकजुट होने पर देश अजेय बन जाता है।”
संघ प्रमुख ने उपस्थित विद्त जनों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत हजारों वर्षों की संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं वाला देश है। भाषा, रीति-रिवाज और परंपराओं में विविधता होने के बावजूद भारतीय समाज को जोड़ने वाली शक्ति उसकी संस्कृति में निहित है। भारत की शक्ति विविधता में एकता है। सभी को साथ लेकर चलने की भावना हमारी परंपरा है। समाज में जाति, वर्ग, क्षेत्र और भाषा के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त किया जाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान मिलना चाहिए। सेवा और सहयोग की भावना से समाज मजबूत बनता है।
उन्होंने कहा कि परिवार व्यवस्था भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी ताकत है। परिवार में संस्कार, मूल्य और जिम्मेदारी की भावना विकसित होने पर बेहतर समाज का निर्माण संभव है। युवाओं को केवल रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त नहीं करनी चाहिए, बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के विकास को केवल आर्थिक प्रगति से नहीं मापा जा सकता। समाज में नैतिकता, अनुशासन और भाईचारे की भावना बढ़ने पर ही वास्तविक विकास संभव है।
कार्यक्रम में सुत्तूर मठ के श्री शिवरात्रि देशिकेंद्र महास्वामीजी उपस्थित थे। इस अवसर पर सद्गुरु मधुसूदन साई की ‘आत्मनो मोक्षार्थं जगत हिताय च’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। व्याख्यान कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति, छात्र, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में गण्यमान्य जन उपस्थित थे।

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