शहर सरकार बदली पर समस्या जस की तस
सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }: चुनाव आता है तो राजनीतिक दल के नेता चुनाव जीतने के लिए वादा करते हैं कि हमारी शहर की सरकार बनेगी को अभी जो समस्या है, कोई समस्या नहीं रहेगी। लेकिन शहर सरकार, महापौर व पार्षद बदलने से कुछ नहीं होता है,जैसे ही गर्मी आती है नगर निगम के कई वार्डों में पानी के लिए हाहाकार मचना शुरू हो जाता है।बारिश आती है तो कई वार्डों में पानी भरने की समस्या रहती है।इस समस्याओं के समाधान के लिए हर चुनाव में वादा किया जाता है लेकिन हर साल यह समस्या बनी रहती है।इस साल तो मार्च से ही कई वार्डों में पानी की समस्या शुरू हो गई थी।बातें तो हर महापौर चुनाव के दौरान व कुर्सी मिल जाने के बाद बड़ी बड़ी बातें करते हैं,पांच साल में करोड़ों रुपए पानी व जलभराव की समस्या के लिए खर्च भी किए जाते हैं लेकिन यह दोनों समस्या हर साल बनी रहती हैं। इसके अलावा साफ सफाई की समस्या तो बारहों महीने बनी रहती है।
मई के महीने मे भूजल स्तर गिर गया है इससे कई वार्डों में पानी नहीं आ रहा है तो कई वार्डों में पानी इसलिए कई लोगों को नहीं मिल रहा है कि लो प्रेशर की समस्या है।हर घर पानी पहुंचाने के लिए निगम की टीम लगातार सुधार कार्य कर रही है।कई स्थानों पर इंटर कनेक्शन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।यह तकनीक कहीं कारगर हो रही है तो कहीं कारगर नहीं हो रही है।गर्मी में पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है और गर्मी में ही राजधानी के लोगो को पानी की किल्ल्त का सामना हर साल करना पड़ता है। रईस लोग तो अपने लिए पानी का टैंकर मंगवा लेते हैं लेकिन गरीब व मिडिल क्लास के लोगों को पानी के लिए रोज जूझना पड़ता है। महापौर व पार्षद की जिम्मेदारी वार्डों में पानी का टैंकर भेज देने से खत्म हो जाती है, वह मान लेते हैं कि वार्ड में पानी टैंकर भेज दिया गया है तो लोगों को पानी मिल गया होगा। यानी पानी की समस्या अब वार्ड में नहीं है।
पानी टैंकर जिस वार्ड में आता है वहां के लोगों से कोई पूछे कि पानी कितनी परेशानी सहन करने के बाद मिलता है। पहले तो पानी टैंकर कब आएगा इंतजार करना पड़ता है। पानी का टैंकर आए तो पानी के लिए लोगों को एक जंग लडनी पड़ती है। इससे एक दिन के पानी की इंतजाम हो पाता है। पीने के लिए पानी का इंतजाम होता है को दूसरे कामों के लिए पानी की कमी हो जाती है। कई घंटे रोज टैंकर से पानी भरने में खर्च होते है और बाकी सारे काम छोड़कर घर के कुछ लोगों को टैंकर से पानी भरना जरूरी होता है। जिनके घर में नल नहीं है , उनको पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ती है तो जिनके घर नल लगा है तो उनको भी पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। कभी पता चलता है कि लो प्रेशर के कारण वार्ड के कई लोगों के घरों में पानी नहीं आ रहा है।
कभी पता चलता है कि कुछ लोग पंप लगाकर पानी खींच लेते है इसलिए कई घरों तक पानी पहुंच नहीं पाता है।इसका एक ही इलाज है निगम के पास कि सुबह व शाम बिजली बंद कर दी जाए।नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक शहर में ७३२०९ नल कनेक्शन है। लोग समझते हैं कि नल लगवा लिए मतलब घर में पानी की कमी नहीं होगी लेकिन जब गर्मी में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है तब ही लगाए गए नल से पानी नहीं मिलता है तो लोगों को नगरनिगम पर गुस्सा बहुत आता है तो नगर निगम इसके लिए खुद को दोषी नहीं मानता है,वह लोगों को बताता है कि इसके हम दोषी नहीं है, इसके लिए तो वे लोग दोषी हैं जो गर्मी में पानी चोरी करते हैं।
सभी लोगों को पानी तब ही मिल सकता है जब कुछ पानी की चोरी न करें। इसके लिए यानी सभी लोगों को पानी मिले नगर निगम अभियान शुरू करने वाला है कि जिस वार्ड में पानी चोरी हो रही है उस वार्ड में निगम रोज सुबह ६.१० से ६.४० तक तीस मिनट बिजली बंद कर दी जाएगी इससे होगा क्या,इससे अवैध पंपों को उपयोग कर जो लोग पानी चोरी करते है, पानी चोरी नहीं कर पाएंगे।इससे लोगों को पानी मिले या न मिले लेकिन निगम के पास तो कहने को रहता है कि वह लोगों का पानी मिले इसके लिए क्या कुछ कर रहे हैं। पानी का संकट पूरे राज्य में है इसके लिए सरकार भी कुछ न कुछ करती हुई नजर आती है।खबरों के मुताबिक राज्य सरकार पानी को लेकर अलर्ट मोड में है।
नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी नगर निगमों व नगर पालिकाओं के लिए फरमान जारी कर दिया है कि अगले साथ दिनों के भीतर शहर के हर बोरवेल व हैंडपंप की जांच कर उसे ठीक करना है यानी ऐसी व्यवस्था करनी है कि इससे लोगों को पानी मिल सके। इसी तरह नालियों के भीतर से होकर जाने वाली पानी की पाइप लाइन को हटाना भी है।ताकि गर्मी में दूषित पानी से लोगों को डायरिया व पीलिया का रोग न हो।इसके अलावा शहर की टंकियाें व जलशोधन संयंत्रों की सिल्ट सफाई व कीटाणुशोेधन का काम भी युध्दस्तर पर किया जाना है।अमृत मिशन व जल आवर्धन योजनाओं को १५ दिन का अल्टीमेटन दे दिया गया है। यानी वे सभी जल योजनाएं जो १५ दिन में पूरी हो सकती है,उनको पूरा करने को कहा गया है।पानी संकट है और हर साल की तरह है,जनता परेशान हैं तो जनता की परेशानी दूर करने नगरनिगम व सरकार सब गंभीर है फिर भी जल संकट है लोगों को मान लेना चाहिए कि यह उनकी नियति है। क्योंकि जो नियति होती है उसे तो सभी को भोगना पड़ता है।
