नेतृत्व ने की गलती, कांग्रेस को बरसों सफाई देनी पड़ेगी

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सुनील दास
संपादकीय { गहरी खोज }:
राजनीतिक दल का नेतृत्व समझदार होता है,दूरदर्शी होता है,बड़े राजनीतिक फायदे और नुकसान को समझता है तो पार्टी को राजनीतिक नुकसान नहीं होता है,पार्टी के लोगों को सफाई नहीं देनी पड़ती है कि हमने ऐसा इसलिए नहीं किया। मुद्दा बहुत बड़ा होता है और बरसों तक जिसकी चर्चा होनी होती है तो राजनीतिक दल के नेताओं को बरसों सफाई देनी पड़ती है। महिला आरक्षण संशोधन मामले में कांग्रेस के नेतृत्व की गलती का खामियाजा अब बरसों कांग्रेस के राज्य नेताओं को भुगतना पड़ेगा और सफाई देनी पड़ेगी कि हम तो महिला आरक्षण चाहते हैं, जैसे ही कांग्रेस नेता सफाई देंगे हम तो महिला आरक्षण चाहते हैं तो महिलाएं तो सवाल पूछेंगी ही कि फिर आपने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया। देश की महिलाओं ने तो संसद में देखा है कि कांग्रेस व विपक्ष के विरोध के कारण महिला आरक्षण विधेयक पारित नहीं हुआ है। अब कांग्रेस नेता रोज सफाई देते रहें कि हम तो महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन महिलाएं इसे मानेंगी नहीं क्योंकि उन्होंने तो संसद में कांग्रेस नेतृत्व को विरोध करते देखा है। महिला आरक्षण के विरोध में वोट डालते देखा है और संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिरने पर कांग्रेस नेतृत्व को खुशी जाहिर करते देखा है।

इसके बाद कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांंधी व पीेएम मोदी की विश्वसनीयता का भी सवाल है कि देश की जनता किसकी बात पर ज्यादा यकीन करती है।देश की जनता पीएम मोदी की बातों पर ज्यादा भरोसा करती है,क्योंकि उनकी बात सीधी और साफ होती है और जनता को समझ में आती है कि पीएम मोदी उनके लिए क्या करने वाले थे और कांग्रेस ने उस काम को करने नहीं दिया। कांग्रेस सहयोग करती तो पीएम मोदी महिलाओं के आरक्षण का जो प्रयास करने वाले थे, वह हो जाता, वह इसलिए नहीं हुआ क्योंकि सहयोग मांगने के बाद भी कांग्रेस ने सहयोग नही किया, विरोध किया और कांग्रेस के विरोध के कारण ही महिलाओं को जो ३३ प्रतिशत आरक्षण २०२९ से मिलता और वह कई बरस बाद ही मिलेगा। महिलाओं का आरक्षण में मिलने वाली देरी के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी व विपक्ष के नेता दोषी है, यह बात पीएम मोदी संसद के भीतर व राष्ट्र के नाम संबोधन में समझा चुके हैं और जनता को यह बात समझ मे आ गई है कि महिलाओं को आरक्षण नहीं मिला है तो उसके लिए कांग्रेस दोषी है।

पीएम मोदी भाजपा के सबसे बड़े नेता है और वह अपनी बात को जनता को समझाने में सफल रहते हैं, इसलिए वह ज्यादा लोकप्रिय भी है और उन पर जनता ज्यादा भरोसा भी करती है। राहुल गांधी अपनी बात जनता को समझा नहीं पाते हैं, वह जो कुछ कहते हैं कि जनता को समझ नहीं आता है। राहुल गांधी की बात कांग्रेस के नेता भी जनता को समझाने का प्रयास करते हैं तो जनता को समझ नहीं आता है। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक गिर गया तो पीएम मोदी इसके लिए दुख व्यक्त करते हैं महिलाओं से माफी मांगते है और कहते हैं कि वह चाहते थे ऐसा हो लेकिन कांग्रेस ने सहयोग नही किया इसलिए हो नहीं सका। पीएम मोदी ने जनता को पहले ही बता दिया था कि यह काम कांग्रेस के सहयोग से ही होगा,उन्होंने इसके लिए संसद में जनता के सामने सहयोग मांगा और जनता ने देखा कांग्रेस ने सहयोग नहीं किया।जनता ने यह भी देखा की कांग्रेस व विपक्ष ने महिला आरक्षण विधेयक गिरने पर मेजे थपथपा कर खुशी जाहिर की थी। इससे जनता को समझ आ जाता है कि कौन महिला आरक्षण के पक्ष में था और कौन विरोध में था।

पीएम मोदी ने संसद के भीतर व बाहर सरल शब्दों में देश के लोगों को बता दिया है कि हम महिलाओं को जल्द आरक्षण देना चाहते थे, इसके लिए प्रयास भी किया। विपक्ष से सहयोग मांगा विपक्ष ने सहयोग नहीं किया इसलिए महिला आरक्षण विधेयक संसद में पारित नहीं हुआ और महिलाओं को आरक्षण नहीं मिला। पीएम मोदी की बात ही देश की महिलाओं व लोगों को समझ आ गई है क्योंकि वह सीधी व सरल भाषा में है और उसे लोगों ने संसद में आंखों से देखा भी है। पीएम मोदी की बात को अब भाजपा को निचले स्तर पर गांवों तक पहुंचाना बहुत आसान है क्योंकि पीएम मोदी एक बार नहीं दो दो बार देश के करोड़ों लोगों तक अपनी यह बात पहुंचा चुके हैं कि वह तो महिला आरक्षण जल्द मिले चाहते थे,अगर वह आज नहीं मिला है तो कांग्रेस के कारण नहीं मिला है।

कोई राजनीतिक दल किसी मुद्दे को बड़ा मुद्दा तब ही बना पाता है जब उसका संगठन गांव गांव तक हो। अब भाजपा ने महिला आरक्षण के मुद्दे को बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास शुरू कर दिया है, राज्य स्तर छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों में भाजपा ने छत्तीसगढ़ में भी महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने पर जनआक्रोश रैली निकाली। फिर एक जनता को बताया गया कि महिलाओं का आरक्षण क्यों जल्द नहीं मिला। इसके बाद महिला आक्रोश सम्मेलन,मंडल स्तर पर पुतला दहन कर फिर लोगों का बताया जाएगा कि महिलाओं को भाजपा आरक्षण देना चाहती थी कांग्रेस के विरोध के कारण संभव नहीं हुआ।भाजपा के पास राम मंदिर जैसा कोई बड़ा मुद्दा अब तक नहीं था, पीएम मोदी ने भाजपा को राममंदिर जैसा बड़ा मुद्दा दे दिया है और भाजपा को उसे बड़ा मुद्दा अगले कई सालों में बनाना है और महिलाओं का बताना है कि उनका हितैषी कौन है और विरोधी कौन है। कांग्रेस नेतृत्व ने जो गलती की है,उसका खामियाजा आने वाले बरसों में कांग्रेस के प्रदेश के नेताओं को भुगतना पड़ेगा। वह महिलाओं काे सफाई देते रहेंगे कि हम आरक्षण के पक्ष में हैं लेकिन महिलाओं का समझा नहीं पाएंगे।

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