डीयू कुलपति ने हंसराज कॉलेज के छात्रों से किया संवाद

0
ad0c0f11180fb35291c02731fe3eaa70

नई दिल्ली{ गहरी खोज }: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि समय और जरूरत के अनुसार परिवर्तन जरूरी है और शिक्षा परिवर्तन का सबसे बड़ा उपकरण है। देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए इनोवेशन, रिसर्च और बिजनेस डेवलपमेंट पर काम होना चाहिए।
प्रो. सिंह ने यह बात गुरुवार को वाइस रीगल लॉज के काउंसिल रूम में आयोजित “कॉफी विद वाइस-चांसलर” के दूसरे अध्याय में हंसराज कॉलेज के विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान विद्यार्थियों के प्रश्नों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही। इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों ने कुलपति से डीयू की व्यवस्था एवं उनके निजी जीवन को लेकर भी प्रश्न किए, जिनका कुलपति ने खुलकर उत्तर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यह पहली वह भाग्यशाली पीढ़ी है, जो विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए सीधे तौर पर जुड़ी है। इस पीढ़ी की जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं। अगले 20-25 साल भारत का स्वर्णिम इतिहास लिखने के हैं और सभी को उसमें अपनी-अपनी भूमिका तय करनी है। सरकार अपने स्तर पर सभी कार्य कर रही है।
एक विद्यार्थी ने विश्वविद्यालय के पहले डीयू साहित्य महोत्सव के आयोजन पर खुशी जताते हुए कुलपति से प्रश्न किया कि आपको यह विचार कहां से आया? कुलपति प्रो. सिंह ने उत्तर देते हुए कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में सभी तरह के विभाग हैं। ऐसे में हमने सोचा कि अगर विश्वविद्यालय ऐसा आयोजन करे तो उसका प्रभाव बहुत व्यापक होगा और विद्यार्थियों को इससे काफी अच्छे अनुभव प्राप्त होंगे। इसके परिणाम काफी अच्छे रहे हैं, साहित्य महोत्सव का आयोजन अब प्रतिवर्ष किया जाएगा और इसमें कुछ और चीजें भी जोड़ी जाएंगी।
एनईपी 2020 को लेकर एक विद्यार्थी के सवाल पर कुलपति ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को बेहतर इंसान बनाना है। ऐसे में परिवर्तन जरूरी हैं। शिक्षा में जब कोई चीज बदलती है तो उसे विद्यार्थी केंद्रित और विद्यार्थियों के हित में होना चाहिए। बदलते वक्त के साथ तकनीक और अनुसंधान को बढ़ावा देने की जरूरत है।
स्नातक में चौथे वर्ष को लेकर पूछे गए प्रश्न पर कुलपति ने कहा कि आज अकादमिक और कॉर्पोरेट सैक्टर में रिसर्च माइंडसेट चाहिए इसलिए इसमें रिसर्च पर जोर दिया गया है। इससे कॉर्पोरेट और अकादमिक में भी रास्ते खुलते हैं। यह शुरुआती दौर है, भविष्य में इसके काफी अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे।
इस कार्यक्रम का संचालन डीयू दक्षिणी परिसर की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी ने किया। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य है कि विद्यार्थियों को सीधे कुलपति से संवाद का मौका मिले और वे अपनी बात खुल कर उनके सामने रख सकें। इस कार्यक्रम के पहले सत्र में मिरांडा हाउस कॉलेज की 10 छात्राओं ने भाग लिया था। इस बार दूसरे सत्र में हंसराज कॉलेज के 13 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में भाग लेने के बाद विद्यार्थियों ने कहा कि उन्हें पहली बार अपने विचार एवं समस्याएं निजी तौर पर सीधे कुलपति के साथ साझा करने का अवसर मिला है। विद्यार्थियों ने कहा कि क्लासरूम से निकाल कर सीधे कुलपति के साथ निसंकोच अपनी बात रखना उनके लिए अनूठा अनुभव था। जिस प्रकार कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने उनके साथ खुले माहौल में बातचीत की उससे वे काफी प्रभावित हुए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *