अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन शांति-सुरक्षा के लिए खतरा

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  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उस प्रस्ताव को सह-प्रायोजित किया जिसमें खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों एवं जॉर्डन के खिलाफ ईरान द्वारा किए गए भीषण हमलों की निंदा की गई है, सभी ईरानी हमलों को तत्काल रोके जाने की मांग की गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों की भी निंदा की गई है। अमेरिका की अध्यक्षता वाली 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने 13 मतों के साथ इस प्रस्ताव को बुधवार को पारित किया। इसके खिलाफ कोई मत नहीं पड़ा जबकि वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत ने 130 से अधिक देशों के साथ मिलकर बहरीन के नेतृत्व वाले इस प्रस्ताव का सह-प्रयोजन किया। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जार्डन की क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता एवं राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति मजबूत समर्थन को दोहराया गया है। इसमें बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के क्षेत्रों पर ईरान के भीषण हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा गया है कि इस प्रकार के कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन तथा अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि ईरान जीसीसी देशों एवं जॉर्डन के खिलाफ सभी हमलों को तत्काल रोके और पड़ोसी देशों के खिलाफ छद्म समूहों के इस्तेमाल समेत किसी भी उकसावे वाली या धमकाने वाली कार्रवाई को तुरंत और बिना शर्त रोके। इसमें दोहराया गया कि व्यापारिक एवं वाणिज्यिक पोतों के नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता का विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्गों के आसपास अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप सम्मान किया जाना चाहिए। इस प्रस्ताव में सदस्य देशों के उस अधिकार को संज्ञान में लिया गया है जिसके तहत वे हमलों और उकसावों से अपने पोतों की रक्षा कर सकते हैं। इस प्रस्ताव में ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय नौवहन को बंद करने, बाधित करने या किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने या बाब अल मंदाब में समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने के उद्देश्य से की गई हर प्रकार की कार्रवाई या धमकी की निंदा की गई। इस प्रस्ताव में कहा गया कि रिहायशी इलाकों पर हमला किया गया, असैन्य साजो सामानों को निशाना बनाया गया और इन हमलों में आम नागरिक हताहत हुए तथा असैन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा। प्रस्ताव में उन देशों और लोगों के साथ एकजुटता जताई गई जो हमलों का शिकार हुए हैं।
    ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध के कारण जहां विश्व स्तर पर आर्थिक व राजनीतिक परिस्थितियां प्रभावित हो रही हैं वहीं खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों ने स्थिति को और तनावग्रस्त बना दिया है। युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। संवाद द्वारा ही हर समस्या का समाधान ढूंढा जा सकता है। ईरान, इजरायल और अमेरिका अगर युद्ध को और आगे बढ़ाते हैं तो उनके साथ-साथ विश्व को भी इस युद्ध के परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
    खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों के कारण वहां की अर्थव्यवस्था तो प्रभावित हुई ही, साथ में भय और तनाव के माहौल के कारण लोगों का पलायन भी शुरू हो गया है, जबकि यह देश युद्ध में किसी तरह भी शामिल नहीं थे। अमेरिका के बेस कैंप तो दशकों से वहां पर थे, उनके बहाने उन पर हमले करने विरुद्ध अब 135 देशों ने अपना एतराज दर्ज कराया है। ईरान को इस प्रस्ताव को गंभीरता से लेते हुए व विश्व शांति के लिए खाड़ी देशों पर हमले बंद कर संवाद के रास्ता चलना चाहिए।

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