भारत पेट्रोलियम से CSR फंड के नाम पर लिए ₹11.50 करोड़, MRI मशीन खरीदकर मरीजों से शुरू कर दी कमाई?

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मुंबई के Sushrut Hospital का कारनामा? सेवा के नाम पर कमाई का खेल

आज हम आपको मुंबई के एक ऐसे मामले का खुलासा करने जा रहे हैं, जहां CSR फंड के जरिए करोड़ों रुपये की MRI मशीन अस्पताल को उपलब्ध कराई गई, मकसद था आम मरीजों और जरूरतमंद लोगों को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधा देना—लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि कहीं जनता के लिए दी गई यही सुविधा अस्पताल की कमाई का जरिया तो नहीं बन गई? मामला है मुंबई के SUSHRUT HOSPITAL & RESEARCH CENTRE, चेंबूर और BHARAT PETROLEUM CORPORATION LIMITED (BPCL) का।

कहानी शुरू होती है BPCL के CSR फंड से। वित्तीय वर्ष 2023-24 में BPCL ने CSR प्रोजेक्ट Code-H043 के तहत Sushrut Hospital & Research Centre के लिए ₹11.50 करोड़ की राशि से एक अत्याधुनिक 3 Tesla MRI मशीन उपलब्ध कराई। यानी करोड़ों रुपये का खर्च हुआ, लेकिन पैसा मरीजों से नहीं, बल्कि CSR के माध्यम से लगाया गया।

मशीन गरीबों के लिए थी, लेकिन अब मरीजों से ₹11,400 तक शुल्क?

RTI में मिले जवाब से यह बात सामने आती है कि BPCL ने CSR फंड के जरिए 3 Tesla MRI मशीन अस्पताल को इस उद्देश्य से उपलब्ध कराई थी कि आम और गरीब मरीजों को MRI जांच की सुविधा कम दर पर मिले और जरूरतमंद मरीजों को रियायत दी जा सके। BPCL के जवाब के मुताबिक, अस्पताल के साथ हुए MOU में 2 प्रतिशत Charity Patients को MRI मुफ्त देने का प्रावधान था। वहीं अन्य मरीजों के लिए MRI की फीस अन्य 3 Tesla MRI केंद्रों की तुलना में कम रखी जानी थी। यानी जिस मशीन के लिए ₹11.50 करोड़ की CSR राशि खर्च की गई, उसके पीछे उद्देश्य केवल अस्पताल को एक महंगी मशीन उपलब्ध कराना नहीं था। उद्देश्य था—मरीजों को राहत, गरीबों को रियायत और जरूरतमंदों को मुफ्त सुविधा।

लेकिन अब सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, मरीजों से MRI जांच के लिए ₹11,400 तक शुल्क लिया जा रहा है। अगर यह शुल्क वास्तव में लिया जा रहा है, तो सवाल बेहद गंभीर है— क्या CSR से गरीबों और आम मरीजों के लिए उपलब्ध कराई गई मशीन का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के अनुसार हो रहा है, जिसके लिए यह सुविधा दी गई थी? क्या 2 प्रतिशत Charity Patients को वास्तव में मुफ्त MRI दी जा रही है? क्या अन्य मरीजों से बाजार की तुलना में कम शुल्क लिया जा रहा है ? या फिर CSR के जरिए उपलब्ध कराई गई करोड़ों रुपये की मशीन से मरीजों से नियमित शुल्क वसूला जा रहा है?

और यहां कहानी का सबसे बड़ा मोड़ सामने आता है—BPCL को ही जानकारी नहीं!

जब RTI के जरिए BPCL से पूछा गया कि इस MRI मशीन का वर्तमान में किस तरह इस्तेमाल हो रहा है और मरीजों से कितना शुल्क लिया जा रहा है, तो BPCL ने जवाब दिया कि उसे इसकी जानकारी नहीं है।

यानी CSR फंड देने वाली कंपनी ने मशीन तो अस्पताल को दे दी, लेकिन उसके बाद मशीन पर मरीजों से कितना शुल्क लिया जा रहा है, कितने गरीब मरीजों को मुफ्त MRI मिल रही है और MOU की शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं—इसकी जानकारी BPCL के पास नहीं है। और भी महत्वपूर्ण बात यह है कि BPCL ने RTI के जवाब में कहा कि उसके पास इस मशीन से लाभान्वित मरीजों तथा मुफ्त या सब्सिडी वाली MRI सेवाओं का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

अब सवाल यह है कि— जब ₹11.50 करोड़ की CSR राशि से जनता के लिए मशीन उपलब्ध कराई गई, तो उसके सामाजिक लाभ का हिसाब कौन रख रहा है?गरीब मरीजों को कितनी मुफ्त MRI मिली, इसका रिकॉर्ड कौन रखता है? कितने मरीजों को रियायती दर पर MRI मिली? और मरीजों से वास्तव में कितना शुल्क वसूला जा रहा है, इसकी निगरानी कौन करता है? RTI से सामने आया BPCL का जवाब इस पूरे मामले की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

CSR की मशीन जनता की सुविधा के लिए दी गई थी—अब सवाल यह है कि उस सुविधा का लाभ जनता को मिल रहा है या मरीजों से ली जा रही फीस के रूप में इसका आर्थिक फायदा किसी और को मिल रहा है? यह आरोप नहीं, बल्कि RTI में सामने आए आधिकारिक जवाबों और अस्पताल में बताए जा रहे शुल्क के बीच पैदा हुआ एक गंभीर सवाल है, जिसका स्पष्ट जवाब BPCL और अस्पताल—दोनों से अपेक्षित है।

गहरी खोज न्यूज़ इस पूरे मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और RTI जवाब के आधार पर आगे की पड़ताल जारी रखेगा।

क्या BPCL और अस्पताल के बीच हुए समझौते की शर्तों का पालन वास्तव में हो रहा है? क्या CSR से मिली मशीन का इस्तेमाल तय सामाजिक उद्देश्य के मुताबिक हो रहा है? और क्या मरीजों से वसूले जा रहे शुल्क की कभी स्वतंत्र जांच या ऑडिट हुई? इन सवालों को देखते हुए मामले की Vigilance/स्वतंत्र जांच की मांग उठना स्वाभाविक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि CSR फंड से मिली मशीन का लाभ वास्तव में आम और गरीब मरीजों को मिल रहा है या नहीं। ₹11.50 करोड़ की CSR मशीन, मरीजों से हजारों की फीस और BPCL को अपने ही प्रोजेक्ट की जानकारी नहीं—क्या यह सिर्फ लापरवाही है या इसके पीछे किसी तरह का गठजोड़ है? इसका जवाब अब स्वतंत्र जांच से ही सामने आना चाहिए।

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