दिल्ली अग्निकांड

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  • इरविन खन्ना
    संपादकीय { गहरी खोज }:
    दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ नामक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें 11 विदेशी नागरिक हैं। दिल्ली सरकार के मुताबिक 23 विदेशी नागरिकों समेत 37 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 16 विदेशियों की हालत गंभीर है और दस वेंटिलेटर पर हैं। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। इमारत के मालिक लवकेश बजाज और उसकी पत्नी को देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। हौज रानी क्षेत्र की तंग गली में स्थित इस छह मंजिला होटल में सुबह करीब 8:30 बजे आग लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाकों की आवाज के बाद इमारत में घना धुआं भर गया और आग तेजी से फैलने लगी। इमारत के अंदर से चीखें सुनाई दीं। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। स्थानीय लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। लोगों ने खिडकियों पर पत्थर फेंककर शीशे तोड़े। ऊपरी मंजिलों पर फंसे कुछ लोग जान बचाने के लिए नीचे कूद गये। गद्दे की दुकानों के मालिकों और अन्य स्थानीय लोगों ने तुरंत गद्दे व कंबल सड़क पर बिछा दिए, ताकि लोगों को नीचे गिरने पर चोट न आए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली सरकार की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ नीति के तहत होटल को केवल छह कमरों की अनुमति थी, लेकिन करीब 25 कमरे बनाए गए थे। बेसमेंट में भी कमरे बनाए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इमारत में प्रवेश और निकास का केवल एक ही द्वार था, खिड़कियां स्थायी रूप से सील थीं और मुख्य द्वार सेंसर से संचालित होता था। इमारत एक तरह से मौत का जाल बन गई थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक होटल में निर्धारित क्षमता से करीब चार गुना ज्यादा लोग ठहराए जा रहे थे और उसके पास जरूरी अग्नि सुरक्षा मंजूरी भी नहीं थी। ग्राउंड फ्लोर पर रेस्टोरेंट था, जबकि बाकी हिस्से का उपयोग होटल के रूप में किया जा रहा था।

दिल्ली के होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत का क्या केवल होटल मालिक ही जिम्मेवार है? क्या स्थानीय स्तर से वह अधिकारी जिनके नाक के नीचे यह अवैध निर्माण हुआ और जिसे स्थानीय निकाय, बिजली विभाग, श्रम विभाग और अग्निशमन विभाग के संबंधित अधिकारियों जिन्होंने सब कुछ अनदेखा किया। क्या वह इस अग्निकांड के लिए जिम्मेवार नहीं? उस क्षेत्र के पुलिस अधिकारी, पार्षद व विधायक यह सभी भी इस अग्निकांड में लोगों की मौत के लिए जिम्मेवार हैं। पड़ोसियों व स्थानीय लोगों की सहायता से काफी लोगों को बाहर निकाल लिया गया, वह अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उनमें से कितने बच पायेंगे अभी कुछ कहना मुश्किल है। परिस्थितियों को देखते हुए कहा जा सकता है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

दिल्ली में दिल दहला देने वाला यह अग्निकांड पहला नहीं, जनवरी से लेकर मई तक आग लगने के कारण 45 लोगों की जान जा चुकी है। दिल्ली में बढ़ती जनसंख्या और विकास के कारण अवैध निर्माण भी बहुत बढ़ गए हैं। ऐसे अवैध निर्माण ही हादसों का मुख्य कारण बन रहे हैं, क्योंकि यह सरकारी नियमों की अनदेखी कर केवल और केवल आर्थिक लाभ और स्वार्थ सिद्धि को प्राथमिकता देते हुए अस्तित्व में आते हैं। अवैध निर्माण के दौरान और बनने के बाद हो रही व्यापारिक गतिविधियों को भी स्थानीय प्रशासन के अधिकारी अनदेखी करते हैं। मुख्य कारण आर्थिक हित और दूसरा राजनीतिक दबाव। जेब गर्म करने के चक्कर में इंसानी जिन्दगी से खिलवाड़ का खेल सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत के साथ ही चलता है।
अब हादसे के बाद जांच के आदेश हो गए हैं, जबकि पहले हुए अग्निकांड में सरकार ने क्या कार्रवाई की वह सार्वजनिक नहीं हुई। समय बीतने के साथ जैसे-जैसे लोग इस हादसे को भूल जाएंगे, तब यह मामला फाइलों में दब जाएगा, खुलेगा तब जब फिर कोई नया अग्निकांड होगा। दिल्ली और देश में बढ़ते अग्निकांड चिंता का विषय है। यह रुकेंगे तभी जब सरकार सख्ती से निर्माण के कायदे कानूनों को लागू करेगी।

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