रिसर्चर्स ने पाया है कि मेटफॉर्मिन दिमाग में ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने में अहम भूमिका निभाता

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विज्ञान { गहरी खोज }:मेटफॉर्मिन का इस्तेमाल दशकों से डायबिटीज के इलाज में किया जा रहा है। हाल की रिसर्च से इस बात पर नई रोशनी पड़ी है कि डायबिटीज की दवा के तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवा मेटफॉर्मिन कैसे काम करती है। हालांकि पहले यह माना जाता था कि यह मुख्य रूप से लिवर और आंतों पर काम करती है, लेकिन स्टडी से पता चलता है कि यह दिमाग के रास्तों पर भी असर डालती है। साइंस एडवांसेज में छपी स्टडी के मुताबिक, रिसर्चर्स ने पाया है कि मेटफॉर्मिन दिमाग में ब्लड शुगर लेवल को रेगुलेट करने में अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि दिमाग शरीर के ग्लूकोज कंट्रोल में भी एक मुख्य कंट्रोल सेंटर के तौर पर काम करता है।Rap1 प्रोटीन अहम है.. अब तक, मेटफॉर्मिन के बारे में माना जाता था कि यह लिवर में ग्लूकोज का प्रोडक्शन कम करके काम करता है, लेकिन रिसर्चर्स ने दिमाग की भूमिका पर भी ध्यान दिया। रिसर्चर्स ने Rap1 नाम के प्रोटीन पर ध्यान दिया, जो दिमाग के वेंट्रोमीडियल हाइपोथैलेमस हिस्से में होता है। यह प्रोटीन भूख कंट्रोल करने और ग्लूकोज पहचानने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने पाया कि जब इस हिस्से में Rap1 की एक्टिविटी कम हो गई, तो मेटफॉर्मिन ब्लड शुगर लेवल को कम करने में असरदार था। इन नतीजों को कन्फर्म करने के लिए, उन्होंने ऐसे चूहों पर एक्सपेरिमेंट किया जिन्हें Rap1 के बिना जेनेटिकली मॉडिफाइड किया गया था।
जब इन चूहों को मेटफॉर्मिन दिया गया, तो ब्लड शुगर लेवल में कोई बदलाव नहीं हुआ। हालांकि, इंसुलिन जैसी दूसरी दवाओं का असर हुआ। फिर रिसर्चर्स ने चूहों के दिमाग में सीधे मेटफॉर्मिन इंजेक्ट किया। हैरानी की बात है कि इसने बहुत कम डोज़ में भी ब्लड शुगर लेवल को काफी कम कर दिया। इससे पता चलता है कि दिमाग दवा के प्रति बहुत ज़्यादा रिस्पॉन्सिव है।दिमाग पर भी असर डालता है.. यह भी पाया गया कि SF1 न्यूरॉन्स नाम के खास ब्रेन सेल्स मेटफॉर्मिन के असर में अहम भूमिका निभाते हैं। ये सेल्स तभी एक्टिवेट होते हैं जब Rap1 मौजूद होता है। Rap1 की गैर-मौजूदगी में मेटफॉर्मिन का कोई असर नहीं होता। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस रिसर्च में मेटफॉर्मिन कैसे काम करता है, इसकी समझ को पूरी तरह बदलने की क्षमता है। इस स्टडी से यह साफ हो गया है कि यह सिर्फ लिवर या आंतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिमाग पर भी इसका असर होता है। साइंटिस्ट्स का मानना ​​है कि इस रिसर्च से भविष्य में डायबिटीज के नए इलाज डेवलप होंगे जो खास तौर पर दिमाग को टारगेट करेंगे।

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